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सोयाबीन में एरियल ब्लाइट का प्रकोप तो मक्का और गन्ने में मौसम की मार

मौसम की मार से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। एक तरफ जहां बारिश और तेज हवाओं की वजह से खेतों में खड़ी किसानों की गन्ना और मक्काबाड़ी पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

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रानीपुर में मक्काबाड़ी की फसल बर्बाद

Maize crop ruined in Ranipur

बैतूल। मौसम की मार से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। एक तरफ जहां बारिश और तेज हवाओं की वजह से खेतों में खड़ी किसानों की गन्ना और मक्काबाड़ी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। वहीं बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से सोयाबीन में एरियल ब्लाइट फंगस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। जिसमें सोयाबीन की पत्तियां झुलसने के कारण पीली पडकऱ नीचे गिर रही है। सितंबर में मूसलाधार बारिश से हुए नुकसान के बाद किसान कर्ज में डूबता हुआ नजर आ रहा है। पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल होने से खेतों में सर्वे का काम भी शुरू नहीं हो रहा है। किसान बड़ी संख्या में मुआवजे और सर्वे की मांग को लेकर कलेक्टोरेट पहुंच रहे है।


बारिश के बाद सोयाबीन पर एरियल ब्लाइट का अटैक
ग्राम सोहागपुर निवासी किसान विनोद राठौर ने बताया इस बार सोयाबीन की फसल अच्छी थी। फसल देखकर मन खुश हो जाता था। अच्छी फसल होने से सोचा था। इस बार सोसाइटी का कर्जा भी पट जाएगा, लेकिन तेज बारिश के बाद धूप निकली और सोयाबीन की फसल पर पीलापन आ गया। पहले दिन कुछ पौधे में पीलापन था। दो दिन में यह पूरे छह एकड़ के रकबे में फैल गया। पूरी फसल पीली हो गई है। राठौर ने बताया फसल पीली होने के बाद पेड़ सूख गया है। अब फसल से कोई उम्मीद नहीं रही है। इस संबंध में उपचार के लिए सलाह लेने बैतूलबाजार के कृषि विज्ञान केन्द्र भी गए थे। वैज्ञानिकों ने बताया जड़ सडऩ का रोग है। इसमें कोई फायदा नहीं होगा। दो वर्ष तक सोयाबीन नहीं बोने की सलाह दी है और मिट्टी का उपचार करने के लिए कहा है। विनोद ने बताया कि छह एकड़ में लगभग 50 क्विंटल सोयाबीन होती। लगभग दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

आसपास के गांवों में भी लगा रोग
ग्राम सोहागपुर के अधिकांश खेतों में फसल के पीले होने का रोग लग गया है। इसके बाद फसलें सूख रही है। फसलों के खराब होने से किसान चिंतिंत है। ग्राम सोहागपुर के ही किसान राजू राठौर, संजय वर्मा, उत्तम माकोड़े, कमलेश रघुवंशी ने बताया उनके खेतों में भी सोयाबीन की फसल पीली होकर सूख गई है। फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों ने बताया सिर्फ तीन दिन पहले तक फसल अच्छी थी। लंबे अरसे बाद सोहागपुर में सोयाबीन की अच्छी फसल देखकर किसान खुश थे। तीन दिन में ही फसल बर्बाद हो गई है। किसानों ने बताया सोहागपुर के अलावा आसपास के गांव रतनपुर,आरुल, जैतापुर, बुंडाला सहित आसपास के गांवों में फसलों की यही स्थिति है। फसलें पीली होने से बर्बाद हो रही है। किसानों ने प्रभावित फसलों को सर्वे कर मुआवजे की मांग की है।

बारिश और तेज हवाओं से गन्ना और मक्काबाड़ी तबाह
जिले में बारिश पर ब्रेक लगने से सूखे की मार से फसलें खराब हो रही थी, लेकिन अब पानी इतना बरस गया कि भारी बारिश की मार से फसलें चौपट हो रही है। जिन किसानों ने खेती के लिए बैंकों से कर्ज ले रखा है, वे फसल बर्बाद होने से सदमे में है, क्योंकि कर्ज की अदायगी कैसे होंगी यही चिंता उन्हें सताए जा रही है। बताया गया कि शाहपुर, रानीपुर, आमला, चिचोली, भीमपुर, भैंसदेही सहित अन्य ब्लॉकों में भारी बारिश से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। गन्ना और मक्का बाड़ी तो खेतों में ही आड़ी हो गई है। सोयाबीन को भी फंगस इंफैक्शन की वजह से नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान फसल नुकसानी का सर्वे कराने और मुआवजा दिलाए जाने की मांग को लेकर कलेक्टोरेट पहुंच रहे हैं।


क्या कहते हैं किसान
- केसीसी पर बैंक से एक लाख रुपए कर्ज लेकर चार एकड़ में गन्नाबाड़ी लगाई थी, लेकिन बारिश से नदी में आई बाढ़ के कारण पूरी गन्नाबाड़ी तबाह हो गई है। खेतों में सर्वे करने भी अभी तक कोई नहीं आया है। चिंता सता रही है कैसे कर्ज भरेंगे और कैसे घर चलाएंगे।
- रामप्रसाद पंवार, कृषक परसोड़ी आमला।
-गन्नाबाड़ी लगाने के लिए सेंट्रल बैंक से एक लाख का कर्ज लिया था। इसके अलावा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति से भी 50 हजार का कर्ज लिया है। उम्मीद थी की इस साल अच्छी फसल होगी, लेकिन बारिश से सब कुछ तबाह कर दिया। सर्वे के लिए भी कोई नहीं आया है।
- दशरथ मलैया, कृषक जोड़ाबड़ रानीपुर।
- चार हेक्टेयर में मक्का लगाई थी। तेज बारिश और हवाओं के कारण पूरी फसल आढ़ी हो गई। अतिवृष्टि से मक्का की फसल को तबाह कर दिया है। बैंक एवं समिति का 50 हजार रुपए का कर्जा हो गया है। पटवारी हड़ताल पर हैं इसलिए सर्वे भी नहीं हो रहा है। मुआवजे के लिए तहसीलदार से मिले हैं।
- रामेश्वर यादव, कृषक चीखल्दा शाहपुर।
- 12 एकड़ में मक्काबाड़ी लगाई थी, लेकिन बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया है। पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। मक्काबाड़ी लगाने के लिए सेंट्रल बैंक से 1.50 लाख और सोसायटी से 55 हजार रुपए का कर्ज लिया था। अब कर्ज की अदायगी कैसे करेंगे, समझ नहीं आ रहा है।
- सुनील झल्लारे, कृषक रानीपुर।
इनका कहना
-बारिश की वजह से सोयाबीन फसल में एरियल ब्लाइट फंगस का प्रकोप बड़ा है। किसान बड़ी संख्या में पौधे लेकर हमारे पास आ रहे हैं। हमनें किसानों को सलाह दी है कि वे फफूंदनाशक का छिडक़ाव करें, क्योंकि यह एक फंगस इंफैक्शन बीमारी है। वहीं बारिश की वजह से गन्नाबाड़ी और मक्काबाड़ी को भी काफी नुकसान पहुंचा है। - डॉ व्हीके वर्मा, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र बैतूलबाजार।