शहर में खुलेआम मिलावटी और नकली खाद्य सामग्री बिक रही है, लेकिन जांच का जिम्मा उठाने वाले वीआईपी ड्यूटी और छुट्टी में बिजी हैं। शिकायत करने पर अफसर खुद को मजबूर बताते हुए हाल-फिलहाल जांच कराने से सीधे इंकार कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिकार मजबूरी तो है... लेकिन किसकी। शहर के लोगों की, या बगैर वैकल्पिक व्यवस्था वीआईपी ड्यूटी लगाने और छुट्टी बांटने वाले विभाग और अफसरों की? आलम यह है कि घटतौली या मिलावट की आशंका होने पर नापतौल तथा खाद्य-औषधि विभाग में शिकायत करने पर दोनों महकमे रिस्पॉन्स नहीं देते हैं। पत्रिका ने मामले में शिकायत का रिस्पॉन्स टाइम निकालने की कोशिश की तो हैरान करने वाली स्थिति सामने आई।