
ये हैं मध्यप्रदेश के पांच प्राचीन शिव मंदिर, दुनियाभर से आते हैं भक्त
भोपाल. देश का हृदय स्थल मध्यप्रदेश सांस्कृतिक विरासत, सम्रद्ध इतिहास से लेकर वन्य जीवन तक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। राज्य धार्मिक आस्था में भी पीछे नहीं है। यहां देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से दो महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर भगवान विराजमान हैं। मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, पचमढ़ी के चौरागढ़ महादेव मंदिर की भी महिमा है। हर साल यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर हम आपको ऐसे ही प्राचीन शिव मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...
भगवान महाकाल, उज्जैन
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन में स्थित है। महाकाल की भस्मारती प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि से पहले यहां शिवनवरात्रि पर्व मनाया जाता है। उज्जैन को अवन्तिका भी कहा जाता है। इसकी स्थापना चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। यहां 12 वर्ष में एक बार सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है। उज्जैन में महाकाल मंदिर के साथ भगवान भोलेनाथ के साथ 84 मंदिर हैं, जिन्हें 84 महादेव के नाम से जाना जाता है।
भगवान ओंकारेश्वर, ओंकारेश्वर
नर्मदा तट बसे ओंकारेश्वर में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दो रूपों में विराजमान हैं। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि विंध्य पर्वत ने यहां भोलेनाथ की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर यहां वे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और यहीं ऋषि-मुनियों की तपस्या पर भगवान शिव ने ओंकोरेश्वर को दो रूपों में अलग कर दिया। मंदिर में रात में चौसर-पांसे, पालना और सेज सजाएं जाते हैं, इसके पीछे मान्यता है कि यहां रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वत विश्राम करते हैं।
भगवान पशुपतिनाथ, मंदसौर
मंदसौर में शिवना नदी के किनारे पर पशुपतिनाथ मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। यहां मूर्ति पर भगवान के आठ मुख हैं, जिसमें उनकी अलग-अलग मुद्रा है। पशुपतिनाथ भगवान शिव का पर्यायवाची नाम है। इस कलात्मक मूर्ति का निर्माण चमकते हुए गहरे तांबे के उग्र चट्टान-खंड में हुआ है। इसका वजन 4600 किलोग्राम है। वक्रता में ऊंचाई 7.25 फीट और सीधी में 11.25 फीट है। इसके 8 सिर हैं, जिन्हें वे दो भागों में विभाजित करते हैं। पहला भाग 4 शीर्ष पर और दूसरा भाग 4 शीर्ष तल में। शीर्ष 4 सिर स्पष्ट, परिष्कृत और पूर्ण हैं तो 4 नीचे के सिर परिष्कृत नहीं हैं।
भोजपुर मंदिर, भोपाल
भोपाल से करीब 23 किमी दूर भोजपुर गांव में भोजेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर में सबसे बड़े शिवलिंग विराजमान है, जिनकी ऊंचाई 3.85 मीटर है। मान्यता है कि पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण एक रात में ही करने का प्रण लिया था। इसके बाद 10वीं शताब्दी में राजा भोज ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। विश्व प्रसिद्घ शिवलिंग की ऊंचाई साढ़़ेे इक्कीस फिट, पिंडी का व्यास 18 फिट 8 इंच और जलहरी का निर्माण 20 बाई 20 से हुुआ हैै। मंदिर बेतवा नदी के किनारे स्थित है और देश-विदेश से श्रद्धालु बड़े शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं।
चौरागढ़ महादेव मंदिर, पचमढ़ी
पचमढ़ी में चौरागढ़ सतपुड़ा की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है, धूपगढ़ सतपुड़ा रेंज का सबसे ऊंचा स्थान है और चौरागढ़ की चोटी भगवान शिव मंदिर का अद्भुत मंदिर है। यहां त्रिशूल चढ़ाने की मान्यता है। भक्त मंदिर में दो क्विंटल तक वजनी त्रिशूल महादेव को अर्पित करते हैं। अब तक मंदिर में 50 हजार से भी ज्यादा त्रिशूल चढ़ाए जा चुके हैं। महाशिरात्रि के अवसर पर यहां आठ दिनों तक मेले का आयोजन होता है। मान्यता है कि भस्मासुर को वरदान देने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर निवास किया था। सावन माह में भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
Published on:
28 Feb 2022 06:33 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
