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जानिए क्या है Article 370, कैसे बना, क्या थे नियम

जानिए धारा 370 के बारे में सब कुछ.....

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 Article 370

Article 370

भोपाल। मोदी सरकार ने भारत के इतिहास में जम्मू-कश्मीर ( Jammu and Kashmir ) को लेकर आज बड़ा फैसला लिया है। जम्मू-कश्मीर से सरकार ने धारा 370 ( Article 370 ) हटा दिया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बना दिया है। इस फैसले से देश भर में खुशी की लहर है।

मध्यप्रदेश में मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले पर जश्न शुरू हो गया है। वहीं पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ( shivraj singh chauhan ) ने कहा है कि यह राष्ट्र के लिए गौरवशाली पल है। यहां पर सवाल ये है कि आखिर धारा 370 है क्या है। mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है कि क्या है धारा 370। जानिए धारा 370 के बारे में सब कुछ.....

- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक 'अस्‍थायी प्रबंध' के जरिए जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्ता वाला राज्य का दर्जा देता है। भारतीय संविधान के भाग 21 के तहत जम्मू और कश्मीर को यह अस्थायी, परिवर्ती और विशेष प्रबंध वाले राज्य का दर्जा हासिल होता है।

- जम्मू और कश्मीर के लिए यह प्रबंध शेख अब्दुल्ला ने वर्ष 1947 में किया था। शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नियुक्त किया था। तब शेख अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर यह दलील दी थी कि संविधान में इसका प्रबंध अस्‍थायी रूप में ना किया जाए।

- धारा 370 के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता, झंडा भी अलग है। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है।

- देश के सुप्रीम कोर्ट के सभी आदेश जम्मू-कश्मीर में मान्य नहीं होते हैं। संसद जम्मू-कश्मीर को लेकर सीमित क्षेत्र में ही कानून बना सकती है।

- धारा के मुताबिक रक्षा, विदेश से जुड़े मामले, वित्त और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य से मंजूरी लेनी पड़ती है।

- धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं है, RTE लागू नहीं है। CAG लागू नहीं होता। भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता।

- धारा 370 के कारण देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं।

- जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

- जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।