
मूक-बधिर छात्राओं को हॉस्टल में रोकने के लिए अश्विनी ने अभिभावक बनकर कराया था एडमिशन
अश्विनी से डरी-सहमी घर में रह रही पीडि़ता ने भाई को बमुश्किल उसके साथ हुई आपबीती इशारों में बताई। तब भाई ने साथ जाकर अश्विनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। विशेष सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट पंकज गौड़ की अदालत में पुलिस ने अवधपुरी थाने के दूसरे मामले में दुष्कर्म, छेड़छाड़, आइटी एक्ट की एक दर्जन धाराओं के अंतर्गत चालान पेश किया। वहीं शाम को महिला थाने के छेड़छाड़ के तीसरे मामले में भी पुलिस ने चालान पेश कर दिया। इस दौरान अश्विनी को केन्द्रीय जेल से जिला अदालत में पेश किया गया।
सरकारी वकील पुनीत तिवारी ने बताया कि अवधपुरी थाने के मामले में अश्विनी के खिलाफ 200 से ज्यादा पेज का चालान पेश किया गया है। इसमें 36 गवाहों के पुलिस ने बयान लिये हैं। अदालत में पेश चालान में बताया गया है कि पीडि़ता वर्ष 2017 में सामाजिक न्याय विभाग उज्जैन की सिफारिश पर भोपाल आई थी। भोपाल में अश्विनी शर्मा के क्रिस्टल सिटी स्थित हॉस्टल में रही थी। अश्विनी शर्मा पीडि़ता को अश्लील वीडियो दिखाकर छेड़छाड़ करता था। अश्विनी ने 28 फरवरी 2018 को पीडि़ता के साथ दुष्कृत्य किया था। पीडि़ता ने जब घर जाने को कहा तो अश्विनी शर्मा ने उसे हॉस्टल में रोकने के लिए खुद अभिभावक बनकर सिलाई का कोर्स सिखाने के लिए एडमिशन कराया था।
सजा सुनते ही कोर्ट रूम से भागा आरोपी, कोर्ट मुंशी की तत्परता से पकड़ाया
चेक बाउंस के एक मामले में सजा सुनते ही आरोपी नजर बचाकर कोर्ट रूम से भाग गया। हालांकि, कोर्ट के स्टाफ की सजगता से भागते समय नीचे पकड़ लिया गया। मामला अपर सत्र न्यायाधीश भूभास्कर यादव की अदालत का है। दोपहर करीब सवा 3 बजे निचली अदालत के फैसले को यथावत रखते हुए नवीबाग बैरसिया रोड निवासी महेशकुमार बाजपेयी को 1 लाख 36 हजार रुपए के जुर्माने और 6 माह के कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनकर बाजपेयी कुछ देर कटघरे में खड़ा रहा। अदालत में मौजूद स्टाफ से नजर बचाकर चुपचाप कोर्ट रूम से बाहर निकल गया।
बाहर निकलते ही बाजपेयी ने दौड़ लगा दी। बाजपेयी को भागता देखकर कोर्ट मुंशी कन्हैयालाल और कर्मचारी कपिल ने दौड़कर बाजपेयी को पहले माले के जीनों के पास पकड़ लिया। पकड़कर वापस उसे कोर्ट रूम ले जाया गया। कोर्ट रूम में बाजपेयी ने दंडवत लेटकर माफी मांगी। जज ने बाजपेयी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा वारंट बनाकर जेल भेजने के निर्देश दिए। यह है मामला-महेश कुमार बाजपेयी ने वर्ष 2008 में गृह फायनेंस लिमिटेड से मकान बनाने के लिए 10 लाख का लोन लिया था। इसके के लिए 10 लाख 81 हजार रुपए का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया था।
मामला अदालत मेंपहुंचने पर बाजपेयी ने कंपनी को ब्याज सहित करीब 13 लाख रुपए लौटा दिए थे। शेष राशि नहीं लौटाने पर निचली अदालत ने बाजपेयी को 1 लाख 36 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसकी अपील बाजपेयी ने सेशन अदालत में की थी। सेशन अदालत ने निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा।
Published on:
01 Sept 2018 10:34 am
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