
भोपाल. शहर की 40 फीसदी आबादी को जलापूर्ति करने वाले बड़ा तालाब का पेट अभी नहीं भरा। अपने पूर्ण जलभराव स्तर 1666.80 फीट से यह दो फीट कम है। यानी करीब 1665 फीट ही भरा है। इस हिसाब से जलापूर्ति के लिए दो माह का पानी कम होना। इसलिए अगले १० महीने तक पानी का संभालकर उपयोग करना होगा।
रोजाना 35 करोड़ लीटर की जरूरत
प्रतिव्यक्ति 150 लीटर के अनुसार शहर की 23 लाख की आबादी के लिए 35 करोड़ लीटर पानी की जरूरत होती। कोलार, नर्मदा, बड़ा तालाब व केरवा से 85 एमजीडी पानी लिया जाता है। लीटर में ये 32 करोड़ बनता है। करीब छह करोड़ लीटर पानी अन्य स्रोतों से लेना पड़ता है।
दो साल में दस एमजीडी बढ़ी
जलापूर्ति के लिए बड़ा तालाब से निर्भरता कम करने के लिए नर्मदा, केरवा और कोलार जलापूर्ति प्रोजेक्ट लाया गया। इसकस उद्देश्य 22 से 25 एमजीडी पानी लेने को घटाना था, लेकिन 35 एमजीडी से ज्यादा पानी लिया जा रहा है।
महंगी पड़ रही नर्मदा तो खींच रहे हाथ
2009 में नर्मदा प्रोजेक्ट से 70 एमजीडी तक पानी लेने की क्षमता बढ़ाने का दावा था। 70 किमी दूर से पानी लाया गया। पंपिंग से बिजली का खर्च सालाना 200 करोड़ रुपए बढ़ गया। लेकिन अब निगम अब भी तालाब पर निर्भर है।
ये करें तो दस माह चलेगा पानी
- 200 से अधिक कॉलोनियों से पानी के अपव्यय की प्रतिमाह औसत शिकायत, इन्हें गंभीरता से लेना होगा।
- 35 से अधिक छोटे बड़े लीकेज। जिन्हें रोकना होगा। शिकायत स्थानीय इंजीनियर गंभीरता से लेना होगा।
- 20 से अधिक ओवरहेड टैंक में ओवरफ्लो की स्थितियां हैं। इसे रोकना होगा।
- 60 हजार से अधिक अवैध नल कनेक्शन। पुराने भोपाल में ज्यादा हैं, इन्हें बंद करना होगा।
- 270 करोड़ रुपए सालाना जलापूर्ति शुल्क की तुलना मे 45 करोड़ की वसूली। इसे 100 फीसदी करना होगा।
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बड़ा तालाब समेत अन्य जलस्रोत पूरे भर जाएं तो बेहतर है। निगम जलापूर्ति की प्लानिंग के साथ काम करेगा। अपव्यय रोकना और लीकेज तुरंत बंद करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
फ्रैंक नोबल, निगमायुक्त
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पब्लिक कनेक्ट
- पानी के बिल की वसूली निगम को सख्ती से करनी होगी। लीकेज से जुड़ी शिकायतें तुरंत हल करने की जरूरत है।
उमाशंकर तिवारी, बाग मुगालिया
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Published on:
21 Sept 2023 01:09 am
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