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बेबाक बयानों से सुर्खियां बटोरते थे बाला साहब…एमपी के तीन शहरों से था कनेक्शन

Balasaheb Thackeray Death Anniversary : बाल ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति के सरताज थे। उनकी 12वीं पुण्यतिथि के मौके पर जानते है बाला साहेब का मध्यप्रदेश से कनेक्शन..।

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Balasaheb Thackeray Death Anniversary

Balasaheb Thackeray Death Anniversary: बाला साहब ने महाराष्ट्र की राजनीति पर कभी न मिटने वाला प्रभाव छोड़ा है। शिवसेना के संस्थापक के रूप में बाला साहब ने महाराष्ट्र के साथ -साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। 17 नवंबर 2012 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था, बाला साहब का आम जनों से इतना स्नेह था कि उनकी अंतिम यात्रा में दो लाख से ज्यादा लोग शामिल थे।

बाला साहेब अपनी शर्तों पर जीने वाले व्यक्ति थे और राजनीति में उनका हर कदम बहुत अहम था। उन्होंने कभी भी चुनाव नहीं लड़ा, न ही मंत्री या मुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया, फिर भी वह महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल के सबसे बड़े स्तंभों में से एक माने जाते थे। वे महाराष्ट्र की राजनीति में एक स्थायी शक्ति बन गए थे, जिनके इशारों पर न केवल उनकी पार्टी, बल्कि विपक्ष और राज्य की सरकारें भी काम करती थीं।

एमपी के इन शहरों से था बाला साहब का कनेक्शन

बाल ठाकरे का इंदौर, देवास और धार से गहरा कनेक्शन था, जो उनके पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ था। 1957 में ठाकरे परिवार के पारिवारिक मित्रों से मिलने के दौरान बाल ठाकरे के पिता ने एक रोचक जानकारी साझा की थी कि वे देवास के राजा बनने वाले थे। देवास का राजपरिवार उन्हें दत्तक पुत्र बनाने का इच्छुक था, लेकिन कुछ कारणों से यह बात पूरी नहीं हो सकी।इंदौर, देवास और धार शहर के लोग अक्सर ठाकरे परिवार के संपर्क में रहते थे।

देवास के विक्टोरिया स्कूल से पढ़े थे पिता

बाला साहब ठाकरे के पिता, सीताराम केशव ठाकरे (प्रबोधनकार ठाकरे), का जीवन भारतीय समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित था। 1901 और 1902 में वे देवास में रहे और विक्टोरिया हाईस्कूल में पढ़ाई की। स्कूल के प्राचार्य गंगाधर नारायण शास्त्री का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव था, और बाला साहब उनकी प्रेरणा से ही अपनी पढ़ाई में रुचि विकसित की। जो बाद में बाला साहब ठाकरे की विचारधारा में भी स्पष्ट रूप से दिखी।

पत्रकार और कार्टूनिस्ट के तौर पर करियर की शुरूआत

बाबा साहब का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार और कार्टूनिस्ट के तौर पर की थी। उन्होंने 'द फ्री प्रेस जर्नल' से अपनी पत्रकारिता की यात्रा शुरू की, और उनके कार्टून 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में भी प्रकाशित हुए। उनके कार्टूनों ने समाज और राजनीति की आलोचना की।


1960 में, उन्होंने पत्रकारिता की नौकरी छोड़ दी और 'मार्मिक' नामक अपनी खुद की पॉलिटिकल मैगजीन शुरू की। इस मैगजीन के जरिए उन्होंने अपनी सोच को आम लोगों तक पहुंचाया। उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा, और 1966 में उन्होंने 'शिवसेना' नामक राजनीतिक पार्टी की स्थापना की।बाला साहब ठाकरे ने अपनी पार्टी के जरिए महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित किया।

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