पांच बड़े चेम्बर बनाए हैं जिसमें चार से पांच दिन में पक रहा है केला, कार्बाइड का केला जल्दी पकता है, फंदा में उद्यानिकी विभाग की मदद से किसान ने लगाया है प्लांट, एथिलीन गैस ethylene gas से पक रहे केले, कार्बाइड से पड़ता है सस्ता
भोपाल. राजधानी के फंदा में संभाग का सबसे बड़ा केला banana पकाने का प्लांट लगाया गया है। इसमें पांच बड़े चेम्बर बनाए गए हैं, एक चेम्बर में एक बार में 550 क्रेट केले पकाए जा सकते हैं। इस प्लांट को लगाने में एक करोड़ से ज्यादा का खर्चा आया है। बुराहनपुर से ही एथिलीन गैस ethylene gas मंगाई जाती है और वहां से ही इन दिनों केला आ रहा है। इस गैस से पके केले स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं।
यहां 150 रुपए प्रति क्विंटल में केले की पकाई होती है, वहीं कार्बाइड से पका केला 200 रुपए क्विंटल में पक रहा है। एथिलीन गैस ethylene gas से केले को पकने में पांच दिन लग जाते हैं, वहीं कार्बाइड से पका केला banana थोड़ा जल्दी पकता है। लेकिन स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक होता है। इससे पेट और आंत की बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है।
फंदा के किसान रतन सिंह मेवाड़ा ने ये प्लांट उद्यानिकी विभाग की मदद से लगाया है और संभाग का सबसे बड़ा प्लांट है। राजधानी में प्रतिदिन 600 क्विंटल केले की खपत होती है। 6 से 8 छोटी बड़ी गाड़ी केला तो रोजाना बुरहानपुर से ही आता है। एक गाड़ी में 100 से 400 क्रेट तक होती हैं। एक क्रेट में 20 किलो केला रहता है। रतन सिंह बताते हैं कि एथिलीन गैस तो सस्ती आती है, लेकिन चेम्बर में लगाए गए उपकरणों का बिजली बिल काफी आता है। अभी विभाग की मदद से प्लांट लगाया है, लेकिन अभी उतनी आवक नहीं हो रही जितनी होनी चाहिए। त्योहार के समय में केला पकाई के लिए ज्यादा आता है। इन दिनो दिवाली का केला पकने के लिए तैयारी की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग नहीं करता जांच
फल, केलों की जांच की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों की होती है, लेकिन ये लोग त्योहार पर भी अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं निभाते। आम दिनों में तो सिर्फ खानापूर्ति ही की जाती है। ऐसे में कार्बाइड से पका काफी केला आम जनता उपयोग कर रही है। जबकि नियमानुसार केले के सैंपल लेकर उसे पकाने के लिए उपयोग की जा रही कार्बाइड की मात्रा की जांच होना चाहिए।
उद्यानिकी विभाग के उप संचालक बीएस कुशवाहा बताते हैं कि फंदा में एक करोड़ रुपए की लागत से केला पकाने का प्लांट लगाया गया है। जिसमें एथिलीन गैस से केला पकाया जाता है। इसमें समय ज्यादा लगता है, लेकिन केला स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
इधर करोंद मंडी के होलसेल केला कारोबारी मो. असलम के अनुसार इस साल बेमौसम बरसात ने अन्य फसलों के अलावा केले की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचाया है जिससे भावों में काफी तेजी है। गत वर्ष इन दिनों में 15-16 पिकअप माल आता था, जो इस साल घटकर 5-6 पिकअप ही रह गया है।