
बेतवा में पानी ही नहीं कैसे करें सुधार?
प्रवीण मालवीय. भोपाल. एनजीटी की प्रिंसपल बैंच ने प्रदेश की चार नदियों के साथ भोपाल से गुजर रही बेतवा नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने की कार्ययोजना मांगी तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीधे तौर पर अपने हाथ झाड़ लिए। बोर्ड ने अपने उद्गम स्थल झिरी से लेकर विदिशा तक बेतवा नदी बरसात में ही बहने वाली बताते हुए गर्मियों में चंद जगह पर मामूली पानी होने की बात बताई। इतना ही नहीं बोर्ड की रिपोर्ट यह भी कहती है कि मंडीदीप के पास नदी में मिल रहे नालों में सिर्फ रहवासी इलाकों का सीवेज है इसमें किसी फैक्ट्री का जरा भी डिस्चार्ज शामिल नहीं है।
समाचार पर दिया था आदेश
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने 2012-13 में नेशनल वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम के तहत रिपोर्ट पब्लिश की थी। रिपोर्ट में प्रदेश की क्षिप्रा, बेतवा, खान और चम्बल के पानी की गुणवत्ता कमजोर होने का जिक्र था। इसके बाद एक समाचार पत्र ने इन नदियों की दुर्दशा पर समाचार प्रकाशित किया, जिस पर एनजीटी की सेंट्रल बेंच ने 10 अक्टूबर 2018 को मप्र को निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश की हिंडन नदी की तर्ज पर इन नदियों को स्वच्छ किया जाए। इस अभियान की रूपरेखा तय करके 31 जनवरी तक एक्शन प्लान मांगा गया।
निगम और दूसरी एजेंसियों के काम गिनाए
- शहरों का सीवेज रोका जाना है, यह काम अमृत योजना के तहत नगर निगम कर रहा है जिसके तहत नालों की गंदगी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर साफ करके नदी में मिलने दिया जाएगा। तीन छोटे एसटीपी और मंडीदीप इलाके में तीन एमएसटीपी पीसीबी की देखरेख में तैयार कराए जा रहे हैं।
- कारखानों से कोई गंदगी नहीं मिल रही है, क्योंकि पीसीबी की ओर से जीरो डिस्चार्ज पॉलिसी पर काम किया जा रहा है।
इन पर उठे सवाल
- मंडीदीप के नालों में सीधे तौर पर फैक्ट्रियों का डिस्चार्ज मिलता है, इन्हें कैसे क्लीनचिट दे दी?
- नदी के ग्रीन बेल्ट का क्या हाल पौधरोपण कब-कब और कौन करेगा?
- स्टॉप डैम कैसे और क्यों बनाए गए इनका जिक्र रिपोर्ट में क्यों नहीं है?
- जब जीरो डिस्चार्ज फैक्ट्रियां हैं तो नालों में आ रहा है सीवेज का पानी रंगीन क्यों हैं? यह केमिकल कहां से आ रहे हैं?
जब उद्गम शुरू होता है तो पानी ज्यादा नहीं होता, उद्गम से 100 किलोमीटर के दायरे में स्टाप डैम नहीं बनने चाहिए लेकिन उद्गम से भोजपुर तक चार स्टॉप डैम बन गए हैं। इनका उल्लेख रिपोर्ट में किया ही नहीं गया। यह तय है कि मंडीदीप के पास कई कारखानों केमिकल डिस्चार्ज बेतवा में मिल रहा है, ऐसे में इन नालों को सिर्फ रहवासी इलाके का सीवेज कैसे कहा जा सकता है? पाल्यूशन बोर्ड का एक्शन प्लान ही झूठ का पुलिंदा है, ऐसे में तय है कि इसका क्रियान्वयन होने पर भी नदी की हालात नहीं सुधरने वाली है।
सुभाष सी पांडेय, पर्यावरणविद्
Published on:
07 Mar 2019 06:03 am
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