भू-माफिया का बढ़ता जाल, 40 फीसदी शिकायतें हैं जमीन-मकान पर कब्जे की

पुलिस-प्रशासन से बेखौफ भू-माफिया: गुंडों ने पीडि़त महिला को जेल से बाहर आने के बाद हमले की धमकी दी

By: Sumeet Pandey

Updated: 19 May 2019, 07:32 AM IST

भोपाल. पुलिस, प्रशासन से बेखौफ भू-माफिया का जाल शहरभर में बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा पुलिस की जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों से लगाया जा सकता है। आवेदन का रेकॉर्ड रखने वाले पुलिस अधिकारी वसीम खान बताते हैं कि 35-40 फीसदी शिकायत तो जमीन, मकान, प्लॉट के अवैध कब्जे की होती हैं। जमीन मालिक को धमकी, हमला कराने तक की शिकायतें हैं। इधर, निशातपुरा इलाके के शिव नगर में प्लॉट पर अवैध कब्जा करने से रोकने पर दलित महिला पूजा अहिरवार पर हमला करने वाले तीनों बदमाश किशन साहू, संजीव तिवारी, धर्मेन्द्र विश्वकर्मा को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पूजा का कहना कि वह पुलिस के कहने पर जिला अदालत में आरोपियों की जमानत पर आपत्ति दर्ज करानी गई थी, जहां तीनों गुंडों ने धमकी दी कि जेल से बाहर आने के बाद उसे देख लेंगे। पीडि़ता पूजा का कहना कि आरोपी उस पर कभी भी हमला करा सकते हैं।

कब्जा ही नहीं, लोन तक ले रहे भू-माफिया
भू-माफियाओं की करतूत कब्जे तक ही सीमित नहीं है। वह प्रॉपर्टी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरे व्यक्ति को बेच देते हैं या बैंक से लोन लेते हैं। जब दूसरा व्यक्ति प्रॉपर्टी पर हक जमाने पहुंचता है, तब धोधाधड़ी का खुलासा होता है। इनके निशाने पर अधिकतर वह लोग होते हैं, जो शहर से बाहर रह रहे हैं। जालसाजी के लिए फर्जी तरीके से तैयार की गई पावर ऑफ अटार्नी का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

इन क्षेत्रों में सक्रिय
निशातपुरा, छोला, भानपुर, अवधपुरी, रातीबड़, ऐशबाग, अशोका गार्डन, अयोध्या नगर, गांधी नगर से सबसे अधिक शिकायत पुलिस के पास पहुंचती हैं। यहां कई लोगों ने जमीन, प्लॉट खरीदकर छोड़ रखा है।


 

पुलिस में गहरी पैठ
भू-माफिया की पुलिस-प्रशासन में गहरी पैठ है। अधिकतर भू-माफिया पुलिस, प्रशासन की धौंस दिखाकर ही जमीन मालिक को धमकाते हैं। पैठ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि शिकायत के बाद भी एफआइआर करने में पुलिस तमाम तरह की कानूनी दलील देकर टाल मटोल करती है।

फर्जी दस्तावेज तैयार करने का रैकेट
शहर में प्रॉपर्टी के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर भू-माफिया को उपलब्ध कराने वाला एक बड़ा रैकेट सक्रिय है। जो अलग-अलग इलाकों में घूम फिर कर खाली जमीन, मकान के फर्जी दस्तावेज तैयार कर भू-माफिया को उपलब्ध कराता है। इसके बदले यह रैकेट भू-माफिया से मोटी रकम वसूलता है। रैकेट का दखल रजिस्ट्री आफिस तक है। फर्जी रजीस्ट्री तक गिरोह करा देता है।

ऐसे बच सकते हैं फ्रॉड से
अगर आप नए प्लॉट, भवन, मकान की रजिस्ट्री कराने जा रहे हैं तो पंजीयन की साइट पर रेरा संबंधी विकल्प से बिल्डर की स्थिति पता करें। जैसे- उसका रजिस्ट्रेशन है या नहीं, प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा? जमीन कितनी है, कितने में काम चल रहा है, प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी वहां मिल जाएगी? इसी वेबसाइट पर दूसरी विंडो में जमीन किसके नाम पर दर्ज है, इसकी भी जानकारी खसरा नंबर से कर सकते हैं। इससे काफी हद तक फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है। इसके अलावा आरसीएमएस में भी ये सुविधा दी गई है, लेकिन पंजीयन की वेबसाइट से जानकारी लेना आसान है।

Sumeet Pandey Desk
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