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भोपाल गैस त्रासदी मामले में हाईकोर्ट ने कहा चार सप्ताह में जवाब दें नहीं तो केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव हाजिर होकर पेश करेंगे जवाब

भोपाल की यूनियन कार्बाईड फैक्ट्री में गैस त्रासदी के 38 साल हो गए हैं। इसके पीड़ित आज भी अपने इलाज और पुनर्वास के लिए परेशान हैं। हाईकोर्ट ने पूर्व दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर सख्ती दिखाई है। मामले पर लंबित अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है।

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भोपाल

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Sunil Mishra

Dec 04, 2022

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भोपाल. हाईकोर्ट ने भोपाल गैस पीडित मामले में चार सप्ताह के भीतर हर हाल में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं हाेने पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को वर्चुअल मोड से हाजिर होकर जवाब पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, आइसीएमआर के सीनियर डिप्टी डायरेक्टर जनरल को अपना व स्वास्थ्य विभाग के जवाब की प्रस्तुति सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पूर्व आइसीएमआर की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई जारी है और सरकार के जवाब का इंतजार है।

भोपाल की यूनियन कार्बाईड फैक्ट्री में गैस त्रासदी के 38 साल हो गए हैं। इसके पीड़ित आज भी अपने इलाज और पुनर्वास के लिए परेशान हैं। हाईकोर्ट ने पूर्व दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर सख्ती दिखाई है। मामले पर लंबित अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जहां गैस पीड़ितों को राहत देने के लिए अब तक हुई काईवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है वहीं, आइसीएमआर के डिप्टी डायरेक्टर से पूछा है कि अब तक हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों पर क्या कदम उठाए गए हैं? सुनवाई के दौरान आइसीएमआर के सीनियर डिप्टी डायरेक्टर आर. रामा कृष्णन की ओर से कहा गया कि उन्होंने गैस पीड़ितों के इलाज के लिए बने भोपाल के बीएमएचआरसी अस्पताल में नियुक्त स्पेशलिस्ट डाक्टर्स और रिक्त पदों बारे में दो बार पत्राचार किया है, जिसमें यह बात भी सामने आई है कि डॉक्टर्स की सैलरी बढ़ाने और नई नियुक्तियों में हर साल सात करोड़ रुपयों का अतिरिक्त खर्च भी सरकार को उठाना होगा।

गैस त्रासदी - 2 और 3 दिसम्बर 1984
- यूनियन कार्बाइड कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ
- तीन हजार लोगों की मौत हो गई और एक लाख लोग हादसे से प्रभावित हुए।
- इसी आंकड़े के आधार पर यूनियन कार्बाइड और भारत सरकार के बीच 1989 में मुआवजे का समझौता हुआ।
- 470 मिलियन डालर यानि करीब 750 करोड़ रुपए
- इस राशि से सामान्य पीडि़त को 25-25 हजार रुपए दिए गए।
- हादसे में मौत पर आश्रितों को एक लाख रुपए मुआवजा मिला।
- 1996 तक दावा अदालतों में गैस पीडि़तों की सुनवाई चली
- तब तक 5 लाख 76 हजार गैस प्रभावित दर्ज हो चुके थे।
- 15 हजार से अधिक गैस कांड के कारण मौतें रजिस्टर्ड हुई।
- 2010 में इन आंकड़ों के आधार पर नए सिरे से मुआवजे पर फैसला
करने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई।