
भोपाल। बीते पांच साल से बन रही भोपाल-जबलपुर सड़क का काम आज तक पूरा नहीं हुआ। दो बड़ी कंपनियां ट्रांसट्राय, एमबीएल काम छोड़कर जा चुकी हैं। इसके बाद सड़क बनाने के लिए पांच हिस्सों में अलग-अलग कंपनियों को ठेका दिया गया, इसके बावजूद निर्माण कार्य तेजी से नहीं हो पा रहा। इसे वर्ष 2018 तक पूरा होना था, लेकिन ठेकेदारों की सुस्ती को देखते हुए 2020 तक बनना भी मुश्किल लग रहा है।
300 किलोमीटर लंबे भोपाल-जबलपुर मार्ग को बनाने का ठेका पांच साल पहले ट्रांसट्राय कंपनी को दिया था, तीन साल तक सड़क न बनाने पर एमपीआरडीसी ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया। इसके बाद सड़क का काम एमबीएल कंपनी को दिया, पर वो भी बीच में ही काम छोड़कर चली गई। इसके बाद सड़क को पांच हिस्सों में बनाने के लिए अलग-अलग टेंडर किए गए, इनमें एक हिस्सा एनएचएआई को दिया गया, शेष चार हिस्से एमपीआरडीसी के पास हैं। एमपीआरडीसी ने गावर, जीबीआर, रेमकी ब्रिज, सेंट्रो ट्रांसट्राय को दिया है।
सात फ्लाईओवर
भोपाल-जबलपुर मार्ग के डीपीआर में सात फ्लाईओवर और 47 अंडर पास बनाए जाना प्रस्तावित है। यह मार्ग 10 लेन का होगा, गांवों के बीच-बीच में जाली और ग्रिल लाई जाएगी, जिससे ग्रामीण वाहन लेकर सीधे सड़क पर न पहुंचें। अंडर पास व फ्लाईओवर से रोड क्रासिंग को रोका जाएगा। जबलपुर के पास शाहपुरा में रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाने का प्रस्ताव है।
क्यों भाग रही हैं कंपनियां
प्रतिस्पर्धा में कम रेट पर ठेका लेने से मैनेजमेंट गड़बड़ा जाता है। एक साथ कई काम लेने से मेनपावर और फंड दोनों कम पड़ जाता है। इन्ही कारणों से ट्रांसट्राय कंपनी ने एक साथ प्रदेश की पांच सड़कों का काम छोड़ा था।
50 हजार को फायदा
सड़क की स्थिति खराब होने पर भी हैवी ट्रैफिक का दबाव है। इस मार्ग से करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन रोज गुजरते हैं। करीब 50 हजार लोग प्रतिदिन अपडाउन करते हैं, इनकी खुद की भी गाड़ी होती है और पब्लिक बसों में भी सफर करते हैं। इस मार्ग से व्यावसायिक वाहन के साथ ही कार, ट्रक, डम्पर सहित अन्य वाहन भी गुजरते हैं।
कंपनियों को काम करने के लिए एक टाइम लाइन दिया गया है। इस पर काम नहीं करने पर उनकी सिक्योरिटी राशि जब्त की जाएगी।
-आशुतोष मिश्रा, चीफ इंजीनियर, एमपीआरडीसी
Published on:
02 Apr 2018 12:00 pm

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