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Bhopal lake :बड़ा तालाब की सेहत सुधारने एक करोड़ खर्च कर बनाई सेप्ट रिपोर्ट पर अफसरों की कुंडली, मार्च में 9 साल पूरे, न सामने आई, न लागू किया

Bhopal lake : बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर अहमदाबाद की सेप्ट यूनिवर्सिटी से 2013 में तैयार कराई रिपोर्ट अब भी अंदरखाने, न सामने ला रहे, न लागू कर रहे

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bada talab

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Bhopal Lake : भोपाल. बड़ा तालाब संरक्षण के लिए अहमदाबाद की सेप्ट यूनिवर्सिटी ने 2013 में रिपोर्ट तैयार की थी। एक करोड़ रुपए इसपर खर्च किए थे, लेकिन 9 साल का लंबा समय बीतने के बावजूद, तो शहरवासियों के सामने इसे लाया गया, न ही, इज़के प्रावधान लागू किए। सेप्ट ने मई 2012 में काम शुरू कर मार्च 2013 में रिपोर्ट तैयार कर जिम्मेदारों को दे भी दी थी। इसमें तालाब किनारे अतिक्रमण और रसूख के कब्जों की पोल पट्टियों के साथ उन्हें हटाने की अनुसंशाएं थी। तालाब के एफटीएल से 300 मीटर तक नो कंस्ट्रक्शन ज़ोन का प्रावधान था। इसलिए ही इसे बस्ते में बंद करके रख दिया गया। अब मार्च 2022 में इसे बने 9 साल पूरे हो गए, लेकिन कोई इस बारे में पूछताछ नही कर रहा।

इसलिए जाहिर नही की रिपोर्ट
- सेप्ट रिपोर्ट लागू करने सुझाव-आपत्तियां आमंत्रित होती तो कई बड़े निर्माणों और तालाब के अंदर तक जैव विविधता को खत्म करने वाले कामों पर सवाल खड़े होते। शासन-प्रशासन को कार्रवाई करना पड़ती। इससे ही बचने के लिए सेप्ट द्वारा बनाए प्लान को बस्ते में ही बंद रहने दिया गया।

इसलिए बड़ा तालाब महत्वपूर्ण
- 2002 में बड़ा तालाब को रामसर साइट घोषित किया गया था। देश भर की कुल 25 रामसर साइट में बड़ा तालाब मध्य भारत की एक मात्र राम साइट है। जैव विविधता को बचाने के लिए कई देशों के विशेषज्ञों का ईरान के शहर रामसर में साल 1971 में एक सम्मेलन हुआ था। इसमें नम भूमि को बचाने के लिए कई कदम उठाने पर सहमति बनी थी। इसके तहत ऐसे नदी, समुद्र या तालाब के किनारे, जहां विदेशी पक्षी और जैव विविधता ज्यादा होती है, उसे रामसर साइट घोषित किया जाता है। इसमें कैचमेंट एरिया को बचाने के लिए प्रावधान किए हैं। करीब 1000 साल पुराना मानव निर्मित बड़ा तालाब प्राकृतिक रूप से नम भूमि है। इतने सालों से इसका ईको सिस्टम बरकरार है। बड़े तालाब और इसके कैचमेंट एरिया में करीब 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं। इसमें करीब 100 से 120 सारस पक्षी भी आते हैं। जैव विविधता के तहत यहां करीब एक हजार प्रजाति के फ्लोरा और फौना कीट और छोटे पौधे पाए जाते हैं।

अवैध निर्माण को नोटिस 1000, कार्रवाई कुछ नही

- बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित खानूगांव समेत आसपास निर्माणों को निगम ने ही 1000 से अधिक नोटिस दिए। चुनिंदा कार्रवाई छोड़ दें तो कोई बड़ी कार्रवाई नही की। बड़ा तालाब भोपाल और सीहोर से सटे इलाके तक फैला हुआ है। इसका 30 फीसदी हिस्सा भोपाल जबकि 70 फीसदी हिस्सा सीहोर जिले में आता है। इसका अधिकतम भू-भाग भले ही सीहोर जिले में हो लेकिन बैरागढ़, कोहफिजा, ईदगाह हिल्स में इस तालाब का पानी लबालब भरा होता है। बड़े तालाब से बीएचईएल, ईएमई सेंटर, रेलवे समेत शहर की जलापूर्ति के लिए के लिए 33 मिलियन गैलन डेली (एमजीडी) पानी खप रहा है।

मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से खतरे में तालाब
- नगर निगम और जिला प्रशासन की जांच में बड़े तालाब के एफटीएल के भीतर 573 अतिक्रमण के मामले सामने आए थे। अतिक्रमण ओं की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है यह पहले से अधिक मजबूत और पक्के हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि तालाब के प्राकृतिक तंत्र को बीते सालों में काफी नुकसान पहुंचा है। इसके आसपास स्थित खेतों में रासायनिक घातक कीटनाशकों और उर्वरकों के बेतहाशा उपयोग और जलग्रहण क्षेत्र में धड़ल्ले से अतिक्रमण के साथ हो रहे निर्माण कार्यों ने झील की सेहत बिगाड़ कर रख दी है।

इनकी सुनें
- सिचाई विभाग के एक्सपर्ट आरएस श्रीवास्तव के अनुसार पिछले 20 सालों में बड़े ताल की उस तरह से देखभाल नहीं कि गई है, जैसी होनी चाहिए थी।

तालाब का जलग्रहण क्षेत्र ही घटकर आधा रह गया है।

- पर्यावरण एक्सपर्ट प्रोफेसर विपिन व्यास का कहना है कि तालाब प्रदेश के दो जिलों में इसका फैला हुआ है। इसके किनारे पर कई एकड़ के खेत हैं, जिनका सिंचाई का पूरा दारोमदार इसी बड़ी झील (अपर लेक) पर ही है। इसे नुकसान पहुंचा तो पर्यावरण ही नुकसान तो होगा ही होगा, कई लोगों की आजीविका है परिवार खत्म हो जाएंगे।


इस अमल हो तो बचे तालाब
- कैचमेंट मैं निर्माण सख्ती से रोका जाए। जो निर्माण हो चुके हैं उन्हें हटाया जाए। पूरी तरह से जैविक खेती शुरू कराई जाए। फुल टैंक लेवल पर 50 मीटर के दायरे में पूरा ग्रीन बेल्ट बने। एफटीएल से 300 मीटर तक सभी तरह के निर्माणों पर रोक लगे। जो निर्माण हो चुके हैं उन्हें हटाया जाए। आसपास के भौंरी, बकानिया, मीरपुर और फंदा आदि क्षेत्रों में हाउसिंग, कमर्शियल और अन्य प्रोजेक्ट्स पर प्रतिबंध लगाया जाए। कैचमेंट के 361 वर्ग किमी क्षेत्र में फार्म हाउस की अनुमति भी शर्तों के साथ ही दी जाए। वीआईपी रोड पर खानूगांव से बैरागढ़ तक बॉटेनिकल गार्डन, अर्बन पार्क विकसित करें।
वन विहार वाले क्षेत्र में गाड़ियां प्रतिबन्धित कर यहां इको टूरिज्म को बढ़ावा दें। स्मार्ट सिटी फंड की तरह अपर लेक फंड बनाइए।
इनके अलावा कैचमेंट में पानी का प्राकृतिक बहाव सिमट रहा है, इसे बढ़ाने का जतन होना चाहिए। अतिक्रमण पर तत्काल सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए

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बड़े तालाब को संरक्षण करने वाली रिपोर्ट को लागू कराया जाएगा। इसे लेकर हम समीक्षा करके, क्या स्थिति है? क्या प्रावधान है? उन्हें लागू कराने की पहल करेंगे।

- भूपेंद्र सिंह, मंत्री शहरी आवास विकास विभाग

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