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2047 तक बढ़ते व्यापार व आबादी को देखते हुए भोपाल को चाहिए और कमर्शियल सडक़ें

कलेक्टर गाइडलाइन में कमर्शियल लोकेशन 1500 से ज्यादा, 8 साल में बढ़ी 99 लोकेशन

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2047 तक बढ़ते व्यापार व आबादी को देखते हुए भोपाल को चाहिए और कमर्शियल सडक़ें

2047 तक बढ़ते व्यापार व आबादी को देखते हुए भोपाल को चाहिए और कमर्शियल सडक़ें

भोपाल. राजधानी में जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए वर्ष 2047 तक शहर को कई कमर्शियल सडक़ें चाहिए जहां लोग व्यापार कर सकें, अपनी रोजी रोटी चला सकें। वर्तमान में जिले की अनुमानित जनसंख्या 30 लाख से ऊपर पहुंच गई है। आगामी 23 साल में इसमें 16 से 17 लाख का और इजाफा होगा, शहर की सीमाएं सीमित हैं। ऐसे में 2047 तक लोगों के लिए व्यापार, ट्रांसपोर्ट, आवास के लिए अभी से प्लाङ्क्षनग करनी होगी। वर्ना अनियंत्रित विकास राजधानी के विकास में बाधा बन सकता है। इसके लिए सबसे पहले जरूरी है मास्टर प्लान 2005 की वे सडक़ें जो अभी पूरी नहीं बनी हैं, उनको बनाकर नया मास्टर प्लान लाया जाए। शहर से सटे क्षेत्रों में जहां विकास की संभावना है, वहां अभी से नर्मदापुरम रोड और कोलार सिक्स लेन जैसी सडक़ों की प्लाङ्क्षनग की जा सकती है। अगर शहर अव्यवस्थित बसता रहा तो ये संभावनाएं कम हो जाएंगी।
2016 से 2023 तक बढ़ीं 99 लोकेशन
वर्ष 2016 की कलेक्टर गाइडलाइन में जिले में 3801 लोकेशन थीं, इसमें से कमर्शियल लोकेशनों की संख्या 1450 के लगभग थी, वर्तमान वर्ष 2023 तक की कलेक्टर गाइडलाइन में 99 लोकेशन बढक़र ये 3900 लोकेशन हो गईं, लेकिन कमर्शियल सडक़ों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ।
व्यापार के लिए बनाने होंगे हब, बड़े बाजार
शहर में कई प्रकार के व्यापार होते हैं। इसमें सभी कैटेगरी की अलग-अलग दुकानें हैं। खाद्य सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल, कई बड़े शॉङ्क्षपग मॉल और अन्य कारोबार की दुकानें हैं। आगे चलकर इसमें इजाफा ही होगा, ऐसे में ये लोग व्यापार करने कहां जाएंगे। इसके लिए समय रहते ठोस प्लाङ्क्षनग की जरूरत है। अगर खाद्य सेक्टर की बात करें तो आगे चलकर ये स्थिति होने वाली है। 2047 तक इनकी संख्या में और इजाफा होगा, अनुमान के तहत इनकी संख्या 18 से 20 हजार उद्योग इकाई की जरूरत होगी। इसके लिए शहर से सटे क्षेत्रों में बगरोदा, अचारपुरा, अगरिया छापर, कान्हासैया व अन्य स्थानों पर बड़े उद्योगों के लिए जमीनें तलाशी जा रही हैं।

ये अच्छी बात है, हमनें भी सेवा में रहते हुए भोपाल और आस-पास उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए शासन की नितियों को आगे बढ़ाया है। लेकिन आने वाले समय में जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए सडक़ों के ऐसे नेटवर्क की जरूरत है, जहां व्यापार के साथ आवासीय गतिविधियां बढ़ाई जा सकें।
- कवींद्र कियावत, पूर्व आइएएस, पूर्व संभागायुक्त भोपाल

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