
Union Budget 2026 (Photo Source - Patrika)
Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार (1 फरवरी) को अपना नौवां बजट पेश किया। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए यह साफ कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकप्रिय फैसलों से ज्यादा लॉन्ग टर्म ग्रोथ और स्ट्रक्चरल मजबूती है। आने वाले वर्षों में भी स्थिरता के साथ तेज़ विकास का रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा।
यह बजट खुद को युवा शक्ति आधारित बताता है, जिसमें गरीबों पर फोकस, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के प्रयास और सुधारों की निरंतरता साफ दिखाई देती है। बजट 2026 को लेकर मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव समेत कई बड़े मंत्री एंव नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जानिए किसने क्या कहा….
बजट को लेकर सीएम मोहन यादव ने कहा कि इस बजट में गरीब, युवा, किसानों और महिलाओं पर खास ध्यान दिया गया है। खासकर, बजट की दिशा और लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की ओर ले जाने का है। इसमें आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी गई है… यह सुनिश्चित करने के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं कि भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बने…"
बजट 2026 को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बयान आया है। उन्होंने बजट 2026 तो विकसित भारत का बजट बताया है। हालांकि वो बजट को लेकर ज्यादा कुछ नहीं बोले। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत का बजट'। कृषि मंत्री इतना ही बोलकर चले गए।
मुझे खुशी है इस बात की जो बजट आया है वह जनता का बजट है, जनता के लिए है. जनता को समर्पित बजट है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को बधाई देते है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी बधाई देते है। इस बजट से सबका साथ और सबका विकास होगा। विपक्ष ने कहा किसानों के लिए कुछ भी नहीं है …प्रश्न पर वे बोले कि बहुत बड़ा बजट ….इतना बेहतर बजट है, इसी से विचलित होकर विपक्ष बाते कर रहा है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बजट 2026 को लेकर अपनी प्रतिक्रया दी है। उन्होंने कहा है कि यह एक प्रोग्रेसिव बजट है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर पर फोकस करता है। यह हर नागरिक के लिए बजट है। खासकर, टेलीकॉम के क्षेत्रों को इस बजट में मज़बूत बढ़ावा मिला है। यह भारत को सशक्त और शक्तिशाली बनाएगा। नॉर्थ ईस्ट के लिए बहुत सारे संस्थानों और जलमार्गों का आवंटन किया गया है। यह बजट को लेकर उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास।
मोदी सरकार के इस बजट में भी मजदूर, किसान और बेरोज़गार युवा पूरी तरह नज़रअंदाज़ किए गए हैं। पूरा बजट देखिए, यह आम जनता के लिए नहीं, बल्कि मोदी जी के मित्रों और चंद बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा का दस्तावेज़ है।
मध्यम वर्ग को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने एक बार फिर निराश किया। बड़े कॉरपोरेट घरानों के करोड़ों के कर्ज़ माफ़ हो सकते हैं, मगर आम टैक्सपेयर्स की मांगों पर कोई ध्यान नहीं। राहुल गांधी जी लगातार कहते हैं कि बजट से दलित-आदिवासी समुदाय गायब है, इस बार भी वही सच सामने आया। पलायन को मजबूर आदिवासी एवं अन्य समाज के लिए इस बजट में कोई विशेष राहत नहीं है। साफ़ है, यह बजट आम जनता के लिए सिर्फ़ निराशा लेकर आया है।
सूट बूट वाली सरकार ने 12 साल पहले शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, किसान कल्याण, ग्रामीण और शहरी विकास को लेकर जो सपने दिखाए थे, वे सपने आज एक एक करके टूट चुके हैं। इन सभी क्षेत्रों में कटौती करके भाजपा सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के आम आदमी के प्रति उसकी नीति और नीयत दोनों ही उदासीन हैं।
केंद्र सरकार का आज पेश बजट पूरी तरह से दिशाहीन है। इसमें किसानों, नौजवानों, महिलाओं, आदिवासी, दलित, OBC और सर्व समाज के लिए दृष्टि का अभाव है। मध्यम वर्गीय परिवार आयकर में छूट की आशा रखते थे लेकिन उस दिशा में सरकार ने कोई क़दम नहीं बढ़ाया। बजट में मध्य प्रदेश को पूरी तरह उपेक्षित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं को तीन हज़ार रुपये प्रतिमाह भत्ता और किसानों को गेहूं तथा धान का बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य प्रदान करने का वादा किया था। लेकिन इस दिशा में केंद्रीय बजट से मध्य प्रदेश को कोई सहयोग नहीं मिला है। मध्य प्रदेश के प्रति सौतेला व्यवहार किया गया है।
Updated on:
01 Feb 2026 05:49 pm
Published on:
01 Feb 2026 02:01 pm

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