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मध्यप्रदेश में सडक़ हादसों की वजह बन रहे 465 ब्लैक स्पॉट,

-पीटीआरआइ ने सडक़ सुरक्षा समिति की स्टेक होल्डर निर्माण एजेंसियों से साझा किए ब्लैक स्पॉट

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मध्यप्रदेश में सडक़ हादसों की वजह बन रहे 465 ब्लैक स्पॉट, सबसे अधिक 28 सागर जिले में-परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रदेश में चिह्नित किए हैं ब्लैक स्पॉट

मध्यप्रदेश में सडक़ हादसों की वजह बन रहे 465 ब्लैक स्पॉट, सबसे अधिक 28 सागर जिले में-परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रदेश में चिह्नित किए हैं ब्लैक स्पॉट

मनीष कुशवाह
भोपाल. देशभर में सबसे सडक़ हादसों के लिहाज से देश में नंबर दो राज्य का तमगा हासिल कर चुके मध्यप्रदेश में भारत सरकार के परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 465 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं। ये वो स्पॉट हैं, जहां इंजीनियरिंग त्रुटि या अन्य कारणों की वजह से सबसे अधिक हादसे होते हैं। ब्लैक स्पॉट की सूची में मप्र के 47 जिलों को शामिल किया है। सबसे अधिक 28 ब्लैक स्पॉट सागर में तो 24 मुरैना में हैं। खरगोन में 21, बड़वानी में 20 और कटनी में 18 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल ने प्रदेशस्तर पर होने वाली सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक में सडक़ निर्माणकर्ता एजेंसियों और स्टेक होल्डर विभागों से इन ब्लैक स्पॉट्स में सुधार करने को कहा है। बता दें, प्रदेश में सुरक्षित यातायात और हादसों की रोकथाम के लिए सडक़ सुरक्षा समिति की समय-समय पर बैठक आयोजित की जाती है। इस समिति में पीडब्ल्यूडी (नेशनल हाइवे), पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी, मप्र ग्रामीण सडक़ विकास प्राधिकरण, एनएचएआइ, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, परिवहन, लोक शिक्षण विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं जनसंपर्क विभाग शामिल है। पीटीआरआइ एडीजी जी. जनार्दन के मुताबिक ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्य के लिए सडक़ सुरक्षा समिति की नियमित बैठक होती है। हादसों को रोकने के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म प्लान के हिसाब से काम किया जाता है।
सडक़ों की जिम्मेदारी को लेकर दिक्कत
पीटीआरआइ द्वारा चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार कार्य के लिए संबंधित सडक़ का जिम्मा उठाने वाली सरकारी एजेंसियों से संपर्क किया जाता है। इस साल चिह्नित किए ब्लैक स्पॉट्स में से 92 ऐसे थे, जिनको दुरुस्त करने की जिम्मेदारी लेने वाली एजेंसियों के बीच विवाद था। हालांकि बाद में इनमें से कई का लेकर स्थिति स्पष्ट हुई और अब 23 ऐसे ब्लैक स्पॉट्स हैं, जिनको दुरुस्त करने वाली एजेंसियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। अब संंबंधित थाने से पुलिसकर्मियों को मौके पर तस्दीक कर संधारण और निर्माणकर्ता कंपनी का पता लगाने को कहा गया है।
ऐसे जानें क्या होते हैं ब्लैक स्पॉट
हर साल सडक़ों के ऐसे 500 मीटर तक के स्थान की पहचान की जाती है, जहां तीन साल में दस या इससे अधिक लोगों की मौत सडक़ हादसे में हुई हो या पांच से अधिक हादसे हुए हैं। एक बार ब्लैक स्पॉट में शामिल होने के बाद संबंधित क्षेत्र इस सूची में तीन साल तक रहता है। इन ब्लैक स्पॉट की पहचान कर आवश्यकतानुसार शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म सुधार कार्य की अनुशंसा की जाती है। शॉर्ट टर्म प्लान में सडक़ की मरम्मत, साइनेज लगाना या अन्य उपाय शामिल हैं। इसके लिए तीन महीने की मियाद तय की जाती है। लॉन्ग टर्म प्लान में पुलिया, ओवरब्रिज या बायपास निर्माण आदि शामिल है। इसकी मियाद एक से दो साल तक रहती है।
ब्लैक स्पॉट अधिक तो हादसे और मौत भी अधिक
पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल के शोध में पता चला है कि एक जनवरी से 31 अक्टूबर तक प्रदेश के 20 जिलों में 24039 हादसे हुए हैं। इनमें 23571 घायल हुए, जबकि 5459 लोगों ने जान गंवाई है। खास बात है कि सबसे अधिक 28 ब्लैक स्पॉट वाले जिले सागर में 1307 हादसे हुए जिनमें 401 लोगों की मौत हुई। मुरैना में 24 ब्लैक स्पॉट हैं, यहां 417 तो 21 ब्लैक स्पॉट वाले खरगोन जिले में 837 सडक़ हादसे हुए हैं। यहां बता दें कि वर्ष 2020 में मप्र में 43360 ट्रैफिक हादसे हुए थे, जिनमें 12629 लोगों ने जान गवंाई थी।


किस जिले में कितने ब्लैक स्पॉट
जिला----- ब्लैक स्पॉट
सागर------28
मुरैना------24
खरगोन-----21
बड़वानी----20
कटनी------18
छिंदवाड़ा-----17
खंडवा------17
जबलपुर-----16
सीहोर-----16
इंदौर----- 15
भिण्ड------15
भोपाल-----15
धार-----14
सीधी-----14
शहडोल----13
बुरहानपुर-----13
शिवपुरी-----12
पन्ना------11
रतलाम-----11
उज्जैन------11
होशंगाबाद----11
राजगढ़------11
सतना-----10
विदिशा-----10
मंडला-----09
ग्वालियर----09
देवास-----08
रायसेन-----08
छतरपुर----07
दमोह------07
नरसिंहपुर----06
मंदसौर-----06
बैतूल-----06
बालाघाट----05
टीकमगढ़----05
गुना------05
नीमच----04
दतिया-----04
दावा: पांच जिलों में नहीं हैं ब्लैक स्पॉट
निवाड़ी, आगर, आलीराजपुर, झाबुआ और श्योपुर जिले में एक भी ब्लैक स्पॉट नहीं हेाने की बात कही गई है। इसके अलावा हरदा, रीवा, उमरिया, अनूपपुर और सिंगरौली में एक-एक तो डिंडौरी, सिवनी, शाजापुर और अशोक नगर में दो-दो ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं।

2900 नव आरक्षक बने मप्र पुलिस का हिस्सा
-प्रदेश के सात पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में दीक्षांत परेड का आयोजन
भोपाल. मप्र पुलिस के सात पीटीएस (पुलिस ट्रेनिंग स्कूल) में सोमवार को पिछले और मौजूदा साल के नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। अनुशासित कदमचाल और देशभक्ति का जज्बा लिए नव आरक्षकों ने दीक्षांत परेड में भागीदारी की। इस अवसर पर इन सभी को कर्तव्यनिष्ठा के साथ दायित्वों का निवर्हन करने की शपथ दिलाई गई। इसके बाद 2910 नव आरक्षक विधिवत रूप से मप्र पुलिस का हिस्सा बने। पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में दस महीने का कठिन प्रशिक्षण लेकर तैयार हुए नव आरक्षकों को शुभकामनाएं दीं। भोपाल के भौंरी स्थित पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में महानिदेशक (लोकायुक्त) राजीव टंडन, इंदौर पीटीएस में विशेष पुलिस महानिदेशक अरुणा मोहन राव, पीटीएस तिघरा ग्वालियर में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेश चावला, उमरिया पीटीएस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डीसी सागर, रीवा पीटीएस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनिल गुप्ता और पचमढ़ी पीटीएस में आइजी दीपिका सूरी के मुख्य आतिथ्य में दीक्षांत परेड समारोह आयोजित हुआ।
दो सत्रों के नव आरक्षक हुए परेड में शामिल
दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को पुरुस्कृत किया गया। समारोह में भौंरी स्थित पीटीएस में 70, पीटीएस इंदौर में इस सत्र के 241 और पिछले सत्र के 966 नव आरक्षक शामिल हुए। पीटीएस तिघरा (ग्वालियर) में 108, पीटीएस रीवा में पिछले सत्र के 537, पीटीएस उमरिया में पिछले सत्र के 384, पीटीएस सागर में 100, पीटीएस पचमढ़ी में मौजूदा सत्र के 127 और पिछले सत्र के 377 नव आरक्षक शामिल हुए। दीक्षांत परेड के बाद इस सत्र के 646 और पिछले सत्र के 2264 नव आरक्षकों की भागीदारी रही।