
दीपाली रस्तोगी के सवालों पर गर्माई राजनीति, कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा के मंत्री ने दिया यह जवाब
भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के बारे में एक लेख से सनसनी फैलाने वाली आईएएस अधिकारी दीपाली रस्तोगी की सोच को प्रदेश सरकार के मंत्री लाल सिंह आर्य ने अनुचित बताया है। दीपाली के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए लाल सिंह आर्य ने कहा कि कभी किसी अधिकारी को काम करने से रोका गया हो, ऐसा वह नहीं मानते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक आईएएस होते हुए भी वह ऐसा सोचती हैं तो यह सोच उचित नहीं है।
आपको बता दें कि दीपाली रस्तोगी और उनके पति मनीष रस्तोगी दोनों ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और मध्यप्रदेश में प्रमुख सचिव स्तर पर पदस्थ थे। कुछ दिन पहले ही मनीष रस्तोगी ने प्रदेश में हुए ई-टेंडर घोटाले को उजागर किया था, जिसके बाद अचानक ही उन्हें उनके विभाग से हटा दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दीपाली रस्तोगी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए गए लेख में कहा था कि आईएएस अधिकारी सिर्फ डिनर पार्टियों और रियायती छुट्टियों तक सिमटकर रह गए हैं। उन्हें ताकत चाहिए तो सिर्फ अपने चहेतों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए।
मामले पर शुरू हो चुकी है राजनीति
वहीं इसी मामले पर अब राजनीतिक चर्चा भी जोर शोर से जारी है। एक तरफ कांग्रेस को दीपाली रस्तोगी के आर्टिकल के बहाने प्रदेश सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है, तो वहीं सरकार के मंत्री दीपाली रस्तोगी को अपने सोच के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मामले में पहले मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस के मीडिया सेल चेयरमैन मानक अग्रवाल का कहना था कि दीपाली रस्तोगी के पति मनीष रस्तोगी ने ई टेंडरिंग घोटाले का ख़ुलासा किया था। इसी वजह से उन्हें वहां से हटा दिया गया था। ईमानदार अधिकारियों के साथ इस तरह के बर्ताव से दीपाली रस्तोगी की नाराज़गी नज़र आती है।
वहीं बीजेपी इसके उलट कुछ और ही कहती नजर आई। भाजपा सांसद आलोक संजर का कहना था कि अधिकारी और नेता दोनों को ही जनता के हित के लिए काम करना चाहिए। अगर इनमें मतभेद होते भी हैं, तो उन्हें दुर करते रहना चाहिए। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि औऱ आईएएस अधिकारी दोनों के सामंजस्य से ही विकास होता है। लोकतंत्र में दोनों की ज़िम्मेदारियां हैं और किसी अधिकारी का मत उसके अनुभव के आधार पर हो सकता है।
वहीं प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य का कहना है कि मैं नहीं मानता कि अफसर नेताओं के इशारों पर काम करते हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जनहित के किसी काम को कभी रोका नहीं गया। वहीं उन्होंने दीपाली रस्तोगी के विचारों पर ही प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि अगर IAS होते हुए वो ऐसा सोचती हैं तो ये सोच उचित नहीं है।
आपको बता दें कि ई-टेंडर घोटाला उजागर होने के बाद मनीष रस्तोगी पर कार्रवाई हुई थी, जिसके चलते दोनों ही अफसरों ने चुप्पी साध रखी थी। रविवार को एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने एक लेख में दीपाली ने लेटरल एंट्री के बहाने आईएएस बिरादरी से लेकर सरकार, अफसर और नेताओं के गठबंधन पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने पिछले दिनों संयुक्त सचिव के स्तर पर नौकरशाही में लेटरल एंट्री के लिए आवेदन आमंत्रित करने वाले विज्ञापन का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए।
Published on:
02 Jul 2018 01:54 pm
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