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BJP बदलने जा रही पूरी यूथ विंग, इन नए चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी

मेनन की रवानगी के बाद दूसरी लाइन को मजबूत करने की तैयारी

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Krishna singh

Apr 18, 2016

BJP OFFICE

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भोपाल.
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन की विदाई हो गई है। मेनन पर आरोप थे कि उन्होंने अपने करीबियों को संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी हैं। लिहाजा, अब संगठन को भी नए सिरे से गढऩे की तैयारी शुरू हो गई है। पार्टी मोर्चा संगठनों में भारी बदलाव करने जा रही है। नए संगठन महामंत्री सुहास भगत इसी को लेकर मंथन में जुटे हैं। कहा जा रहा है कि मेनन 'राजÓ में ज्यादातर मोर्चा संगठन बेदम हो गए थे।


इनमें होना है बदलाव
युवा मोर्चा

भाजपा की सबसे ताकतवर एवं मजबूत विंग, लेकिन अब बेदम। विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में भी अपनी छाप नहीं छोड़ पाया।ं। सूत्रों के मुताबिक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष अमरदीप मौर्य को मेनन के करीबी होने के कारण भोपाल के जिला संगठन सहायक से सीधे युवा मोर्चा की कमान सौंप दी गई। उनका युवा एवं छात्र राजनीति से कोई संबंध नहीं था, जिसका असर युवा मोर्चा पर पड़ा। इनका हटना तय है।


अल्पसंख्यक मोर्चा

पिछले तीन बार से लगातार अध्यक्ष चुने जा रहे हिदायतउल्ला शेख का भी हटना तय माना जा रहा है। हालांकि उनके खाते में कई उपलब्धियां हैं। अल्पसंख्यकों के विधानसभा और लोकसभा से लेकर नगरीय निकाय तक में पार्टी के पक्ष में वोट दिलाने के कारण उन्हें लगातार यह जिम्मेदारी दी जाती रही। लेकिन शेख अब मोर्चा से मुक्ति होना चाहते हैं। उन्हें सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है।


महिला मोर्चा

महिलाओं में पैठ नहीं बना पाया। अध्यक्ष लता वानखेड़े अनुभवहीन हैं और पूरे समय विवादों में रहीं। मेनन की पसंद के चलते वानखेड़े सरपंच से सीधे अध्यक्ष बनीं। वे कुछ समय जरूर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहीं। उनकी एक के बाद एक पदोन्नति सवाल खड़े करती रही। अब वे राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हैं।


किसान मोर्चा

इस मोर्चा के खाते में प्रदेश में कई बड़े सम्मेलन एवं आयोजन करना आया। इसके अध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर ने विधानसभा और लोकसभा में टिकट का दावा किया लेकिन नहीं मिला। इस कारण उन्हें किसान आयोग का अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन वे वहां संतुष्ट नहीं है और प्रदेश संगठन में काम करने की इच्छा जता चुके हैं।


अजा मोर्चा

अध्यक्ष गजेंद्र पटेल भी मोर्चा में जान डालने में नाकामयाब रहे। मेनन के करीबी होने के कारण उन्हें भीकनगांव से विधानसभा का टिकट भी मिला, लेकिन मोदी लहर के बाद भी हार गए। वजह उन पर गुटबाजी के आरोप लगते रहे हैं। अपने गृह जिले बड़वानी में ही गुटबाजी में उलझे, इसका असर मोर्चा पर पड़ा।


पिछड़ा वर्ग मोर्चा

अमित शाह ने पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ को मोर्चा का दर्जा दिया। प्रकोष्ठ के संयोजक प्रदीप पटेल को ही मोर्चा का अध्यक्ष मनोनीत किया गया, लेकिन वे अपेक्षाकृत काम नहीं कर सके। उन्हें मैहर उपचुनाव से पूर्व पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस कारण यहां नए अध्यक्ष का चयन होना तय है।


अजजा मोर्चा

पूरी भाजपा डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती मना रही है लेकिन इसके अनुरूप मोर्चा की सक्रियता नहीं दिख रही। ओमप्रकाश खटीक इसके अध्यक्ष हैं। उन्हें समझौते के तौर पर इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, इस कारण वे ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे। जबकि उनसे पहले अध्यक्ष रहे लालसिंह आर्य ने मोर्चा में बेहतर काम किए थे।


खरा उतरना होगा

'नई टीम जल्द ही बनाई जाएगी। पार्टी की प्राथमिकताओं पर खरे उतरने वालों को ही जिम्मेदारी दी जाएगी।Ó

-नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष

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