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कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, कांग्रेस नेता एवं पूर्व महाधिवक्ता भी भाजपा में शामिल

कांग्रेस नेता एवं पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने भाजपा ज्वाइन कर ली। शशांक शेखर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के बेहद करीबी माने जाते हैं।

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भोपाल

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Manish Geete

Feb 08, 2024

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। लगातार तीसरे दिन कांग्रेस से भाजपा में जाने का सिलसिला चलता रहा। गुरुवार को कांग्रेस नेता एवं पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने भाजपा ज्वाइन कर ली। शशांक शेखर राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के बेहद करीबी माने जाते हैं।


कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने का सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा। कांग्रेस नेता एवं पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने भाजपा का दामन थाम लिया। प्रदेश भाजपा कार्यालय में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और जबलपुर महापौर जगतबहादुर अन्नू की उपस्थिति में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शशांक शेखर को सदस्यता दिलाई।


शशांक शेखर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के सचिव भी निर्वाचित हो चुके हैं। कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर तन्खा की अनुशंसा पर उन्हें महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था।

शशांक शेखर ने पार्टी बदलने को लेकर कहा कि उनकी सनातन मूल्यों में गहरी आस्था है। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के आमंत्रण की कांगेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से उपेक्षा की गई थी, इससे गहरा दुख हुआ। तभी से उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का मन बना लिया था। शेखर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत ने देश-दुनिया में जो प्रतिमान स्थापित किए और विकसित भारत की दिशा में कदम पढ़ाए, उससे भाजपा के प्रति आकर्षण बढ़ा है।

इससे एक दिन पहले बुधवार को भी कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा था, जब जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। उनके साथ ही डिंडोरी जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते सहित डिंडौरी के कई नेताओं ने भाजपा ज्वाइन कर ली। इससे पहले मंगलवार को दिग्विजय समर्थक सुमेर सिंह गड़ा और उनके पुत्र धनंजय सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें भाजपा की शपथ दिलाई थी।

भाजपा के पास है 28 सीटें

सभी राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। अप्रैल से लेकर जून के बीच कई चरणों में चुनाव हो जाएंगे। मध्यप्रदेश में भाजपा ने साल 2019 में हुए चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 में से 28 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। साल 2014 में भी भाजपा ने राज्य की 27 सीटें जीती थीं।

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