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आक्रोश की आग भड़काते सात सवाल

कंपनी कार्यालय से प्रभात चौराहे तक तीन घंटे चला प्रदर्शन, कंपनी ने पांच लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की 

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Krishna singh

Aug 13, 2016

junior engineer murder

junior engineer murder

भोपाल. चांदबड़ बिजली कार्यालय के जूनियर इंजीनियर कमलाकर बरोडे की हत्या के बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि आम उपभोक्ता के इस तरह उग्र होने की क्या वजह है। जानकारों का कहना है कि बिजली से जुड़ी सात वजहें हैं, जिनसे उपभोक्ताओं को काफी परेशान होना पड़ता है। कई बार यह आक्रोश बेकाबू हो जाता है। यदि इनका हल ढूंढ लिया जाए, तो बिजली दफ्तरों में होने वाली हिंसक घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इनका हल ढूंढना होगा
1. जटिल बिजली बिल
वजह : टैरिफ के साथ कई टैक्स अलग-अलग जुडऩे से बिल राशि को लेकर उपभोक्ता भ्रमित होता है।
समाधान : टैरिफ के साथ टैक्स जोड़कर राउंड अप बिजली बिल बने।
2. अधिक रीडिंग दर्ज होना
वजह : रीडिंग का पूरा काम ठेके के अनट्रेंड कर्मचारी। मनमर्जी रीडिंग की रोजाना 200 शिकायतें आ रहीं।
समाधान : रीडिंग का काम बिजली के स्थायी कर्मचारियों को दिया जाए।
3. बिजली बंद होना
वजह : इंजीनियर वसूली में लाइन पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा।
समाधान : लाइन के लिए डेडिकेटेड कर्मचारी हो। मॉनीटरिंग पुख्ता हो।
4. नए कनेक्शन में लेटलतीफी
वजह : नया कनेक्शन आउटसोर्स पर है। कंपनी के पास 1500 शिकायतें एेसी हैं, जिनमें उपभोक्ताओं से कर्मचारियों ने पैसे मांगे हैं।
समाधान : काम स्थायी कर्मचारियों को दें। जोन कार्यालय पर आवेदन लेकर एक दिन में कनेक्शन दें।
5. कनेक्शन काट दिया
वजह : यह काम भी आउटसोर्स है। एक कनेक्शन काटने पर 200 रुपए भुगतान होता है।
समाधान : यह काम क्षेत्र के लाइन स्टाफ को ही दिया जाए। पहले यही व्यवस्था थी।
6. मीटर बदलने में देरी
वजह : मीटर का लगाने का काम भी आउटसोर्स पर है। इनकी खरीदी जिन कंपनियों से की जाती है, वे टुकड़ों में मीटर आपूर्ति करती हैं। समाधान : मीटर की थोक खरीदी हो। बिजली के जोन कर्मचारियों को ही मीटर का जिम्मा दिया जाए। में बार-बार बदलाव
7. सॉफ्टवेयर में बदलाव
वजह : बिलिंग सॉफ्टवेयर में बार-बार अपटेडेश। उपभोक्ताओं को प्राप्त बिल और ऑनलाइन बिल में अंतर।
समाधान : पूरे कंपनी क्षेत्र में एक सॉफ्टवेयर हो।
शहरी और ग्रामीण अलग-अलग व्यवस्था खत्म की जाए। बार-बार बदलाव न करें।नोट- समाधान, जैसे बिजली कंपनी के एक्सपर्ट ने बताए।

सुरक्षा के नाम पर दो कैमरे, वह भी बंद
हत्या के वारदात के बाद भी सुरक्षा में लापरवाही के वही हाल हैं। पुलिस ने जब साक्ष्य जुटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो वह बंद मिले। वहीं, घटना के बाद एक भी सुरक्षाकर्मी दफ्तर में नहीं तैनात किया गया। चांदबड़ दफ्तर के प्रभारी अंकुर कांसकर ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों नहीं होने से कर्मचारी दहशत में हैं। यहां करीब 60 कर्मचारी हैं।

उपभोक्ताओं से जुड़े मीटरिंग, रीडिंग और बिलिंग का काम आउटसोर्स पर है। 80 फीसदी शिकायत इन्हीं को लेकर है। मेंटेनेंस आउटसोर्स से हो और मीटरिंग, रीडिंग, बिलिंग स्थायी कर्मचारी से कराएं तो स्थिति सुधरेगी।
-वीकेएस परिहार, इंजीनियर