
Blue Whale Game: Our teenage not to organic waste
भोपाल। विगत कई दिनों से न्यूज चैनलों पर व शोसल मिडिया पर कुख्यात आनलाइन ब्लू व्हेल गेम की चर्चा जोरों पर है। जिसे सुनकर मेरी आंतरिक रूह कांप उठी। क्या ऐसा भी खेल हो सकता है जो मासूमों के रक्त का पिपासा हो? कुछ दिनों से यह समाचार सुनने को मिल रहा है कि अब तक अनेक किशोर इस गेम का शिकार हो चुके हैं। यह बात भोपाल के आर्च बिषप लियो कार्निलियो ने अपने संदेश में कही।
किशोरों के रक्त का प्यासा ब्लूव्हेल
शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसे खेल खेलना पंसद नहीं हो। हम सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी कोई न कोई खेल तो जरूर खेला होगा। क्योंकि खेलों से तो हमारे शरीर को ऊर्जा,आनंद और स्फूर्ति मिलती है इसलिए खेल हमेषा से सभी वर्ग के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। पर आज हमारे किशोरों के रक्त का प्यासा ब्लू व्हेल खेल का आवरण धारण कर हमारे दरवाजों पर दस्तक दे चुका है उसका आगाज़ अपरिपक्व किशोर है जो अपने नाम के अनुरुप व्हेल मछली के सदृष्य मुंह फाड़े हमारे चिरागों को निगलने के लिए तैयार है।
हमें फिर से सोचना होगा
साइकोलॉॅजी के एक छात्र फिलिप्प बुडेकिन ने अपने गेम ब्लू व्हेल गेम के माध्यम से स्वतः ही निर्णय ले लिया कि जैविक कचरा अर्थात (अपरपिक्व किशोरों )को हटाने का। क्या यही गेम है? क्या एक खेल किशोरों को इतना मजबूर कर सकता है कि वह आत्महत्या को स्वतःही गले लगा लें? क्या हमारे अपरिपक्व किशोर जैविक कचरे की श्रेणी में आते हैं? क्या हमारा आधुनिक समाज काफी हद तक जिम्मेदार है? ये सब प्रश्न हमें सोचने को मजबूर करते हैं।
बेहद पीड़ादायक है यह खेल
ब्लू व्हेल चैलेंज गेम एक इंटरनेट खेल है। जिसका कई देशों में मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। खेल कथित तौर पर एक श्रंखला में होते हैं जिनमें किशोरों को 50 दिन की अवधि में कई कार्य आबंटित किए जाते हैं। ये 50 दिन की अवधि में दिन प्रति दिन किशोरों के कोमल मस्तिष्क पर नए -नए डरावने व पीड़़ादायक कार्य देकर उनकी मानसिक स्थिति को क्षीण कर देते हैं। तत्पष्चात किशोर नैतिक रूप से असहनीय उत्पीड़न से गुजरने के कारण असहाय, अकेलापन सा महसूस करते हैं जिसका अंतिम परिणाम सिर्फ और सिर्फ आत्महत्या होती है।
मस्ष्कि काम करना बंद कर देता है
किशोरों का मस्तिष्क काफी जटिल और भ्रमित होता रहता है। उनका मस्तिष्क पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ होता है। वह वयस्क मस्तिष्क की तरह काम नहीं कर सकता ये एक ऐसे चालक की तरह होता है, जिसे गाड़ी चलाना तो आता है लेकिन ब्रेक का प्रयोग नहीं आता जिससे आगे चलकर दुर्घटना भी हो सकती है। ऐसे में माता-पिता क्या करें?
आनलाइन जीवन का समय कम करें
हम 21 वी शताब्दी में जी रहें हैं । इस तकनीकि युग में जहां हाल ही में पैदा हुआ शिशु भी आनलाइन के स्पर्श में आ जाता है। वहां बच्चों को आनलाइन की दुनिया से पूरी तरह से हटाया नहीं जा सकता, लेकिन आनलाइन दुनिया में बिताया जाने वाला समय जरुर कम किया जा सकता है व आनलाइन में बड़ी आसानी से बहुत से वर्जित सामग्री के बारे में पता किया जा सकता है। ऐसे साफ्टवेयर का इस्तेमाल करें जिससे की ऐसी सामग्री पहले से ही फिल्टर हो जाएं। क्या माता पिता को इसके लिए पर्याप्त ज्ञान और समय है?
अपने बच्चों के मित्र बनें
व्यस्तता के बावजूद अपना समय निकालकर वे अपने बच्चों के विश्वासी मित्र बनें। बच्चों की उम्र का बनकर उनके काम व उनके दोस्तों में रुचि जाहिर करें। अपने बच्चों को परिवार की आर्थिक स्थिति से अवगत कराते हुए छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दें। किसी भी एक समय बच्चों के साथ भोजन ग्रहण करें। सप्ताह में कम से कम एक बार बच्चों के साथ बाहर घूमने जाएं। उन्हें इनडोर गेम के बजाए आउटडोर गेम के लिये प्रेरित करें। दूसरों द्वारा किए गए शिकायतों व सकारात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते हुए अपने अनुसार निर्णय लें। अपने बच्चों पर विश्वास करें। उनके डर व कमजोरियों को प्यार व धैर्यता के साथ विकास की ओर ले जाएं। तुलनात्मक विचार न पालें। उनके प्रत्येक व्यक्तिगत व आनलाइन गतिविधियों के ऊपर नजर रखें। उनके मित्रों के चुनाव पर ध्यान दें। बच्चों को ना कहना और ना को स्वीकार करना सिखाएं, उन्हें बताएं कि उन्हें ऐसा कोई काम करने की जरूरत नहीं है जो उन्हें असुरक्षित या असहज महसूस कराएँ। उनके फेैसलों का सम्मान करें। अनुषासन व छूट के बीच संतुलन बनाकर गंभीर परिस्थितियों में सायकॉलाजिस्ट या कांउसलर की मदद लें व सबसे महत्वपूर्ण बात अपने बच्चों का जीवन आध्यात्मिकाता की ओर प्रेरित कर नैतिक मूल्यों का विकास करें। इन बातों का ध्यान रखकर हम कुछ हद तक अपने बच्चों को खैाफनाक गेम से बचा सकते हैं ।
दुनियाभर में उभरी चिंता
इस खेल ने ना सिर्फ भारत में बल्कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम सहित पूरे पष्चिम यूरोप में महत्वपूर्ण चिंता का विषय खड़ा कर दिया है। इस नैतिक खलबली की श्रंखला में न सिर्फ परिवार बल्कि समाज, धर्म संघ, राष्ट्र, शोसल मीडिया प्रवक्ता का उत्तरदायित बनता है कि किशोरों के प्रति संवेदना रखते हुए ऐसे हिंसात्मक खेल की नीति के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुये खेल को हमारे राष्ट्र में प्रतिबंधित किया जाए व शोसल मीडिया परिवार के अभिभावकों के आधार कार्ड लिंक के बाद ही बेवसाइड डाउनलोड होने की सुविधाएं हों जिससे कि देश के भावी किशोर जैविक कचरे के नाम पर बलि न चढ़ने पाएं।
Published on:
07 Sept 2017 01:55 pm
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