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जब अमृत प्रोजेक्ट के 950 करोड़ मिलेंगे तभी बिछ पाएगा भोपाल के 55 फीसदी क्षेत्रों में सीवेज नेटवर्क

नगर निगम भोपाल ने एनजीटी को दी जानकारी, भोपाल में अभी केवल 45 प्रतिशत क्षेत्र में ही बिछ पाया नेटवर्क, जलस्रोतों में मिलने वाले सभी नाले भी नहीं रूक पाए

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भोपाल

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Sunil Mishra

Aug 06, 2022

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भोपाल के छोटा तालाब में अभी भी मिल रहे नाले

राजधानी में अभी केवल 45 प्रतिशत भाग ही सीवेज नेटवर्क से जुड़ पाया है। शेष बचे शहर में सीवेज निस्तारण की समुचित व्यवस्था करने के लिए नगर निगम को 950 करोड़ रूपए की जरूरत है। यह राशि मिलने पर ही सीवेज नेटवर्क की व्यवस्था हो पाएगी। तब तक शहर के बचे हुए 55 फीसदी क्षेत्र का अनुपचारित सीवेज नालों में ही बहता रहेगा और जलस्रोतों को गंदा करता रहेगा। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
एनजीटी ने आर्या श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए प्रकरण में नगर निगम को जलस्रोतों में सीवेज मिलने से रोकने के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे और रिपोर्ट मांगी थी। नगर निगम ने हाल ही में एनजीटी को सौंपे अपने जवाब में यह जानकारी दी है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि शहर के 45 प्रतिशत हिस्से में अमृत-1 प्रोजेक्ट के तहत काम कराया गया है। इसकी लागत 442 करोड़ रूपए थी। इसके तहत पुराने सीवेज सिस्टम का नवीनीकरण, नई सीवर लाइन डालने के साथ नए सीवेज पंप हाउस और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। अब शेष शहर में सीवेज नेटवर्क का काम अमृत -2 के तहत किया जाएगा। इसके लिए डीपीआर बनाने का काम चल रहा है। इसके लिए 950 करोड़ रूपए की जरूरत होगी। बजट मिलने के बाद ही नए क्षेत्रों में काम शुरू होगा।

केवल 1 लाख 26 हजार घर जुड़े सीवेज नेटवर्क से

भोपाल में पिछले दो साल में सीवेज नेटवर्क डालकर 30 हजार घरों को सीवेज कनेक्शन से जोड़ा गया, अभी 16 हजार को और जोड़ने का काम चल रहा है। कुछ पहले से जुड़े हुए थे। निगम अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार अभी तक भोपाल में 1 लाख 26 हजार घरों को सीवेज नेटवर्क से जोड़ा गया है। जबकि भोपाल में करीब 4 लाख हाउसहोल्ड हैं।
सीवेज वाले 11 नाले अभी भी मिल रहे जलस्रोतों में
शहर में 68 नाले सीधे जलस्रोतों बड़ा तालाब, छोटा तालाब, सिद्दीक हसन खां तालाब, मोतिया तालाब, कलियासोत नदी आदि में मिल रहे थे। निगम का दावा है कि इनमें से 57 नालों को डायवर्ट कर एसटीपी से जोड़ दिया गया है। जिससे इनका गंदा पानी सीधे जलस्रोतों में नहीं मिलेगा। हालांकि अभी 11 नाले डायवर्ट नहीं हो पाए हैं। इन्हें डायवर्ट करने का काम भी अमृत-2 प्रोजेक्ट में ही किया जाएगा। एसटीपी में ट्रीट किए गए पानी का उपयोग गार्डनिंग, कृषि, फायर ब्रिगेड, सड़कों की सफाई में किया जा रहा है।
सीवेज ट्रीटमेंट की यह है स्थिति
प्रतिदिन कुल निकलने वाला सीवेज- 390 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी)
कुल ट्रीटमेंट क्षमता - 171.92
दोनों में गैप- 218.08 एमएलडी
एसटीपी और उनकी क्षमता
एसटीपी- क्षमता (एमएलडी में)
कोटरा- 10
चूना भट्टी- 9.5

गोंदरमउ- 2.34

माता मंदिर- 4.56

बावडिय़ा कलां- 13

बड़वई- 16.7

महोली दामखेडा- 35

बरखेड़ा पठानी- 4.5

पिपलानी भेल- 2.5

शिरीन रिवर- 5

नीलबड़- 6

सनखेड़ी- 32

चार इमली- 4.5

मिसरोद- 20.5
प्रोफेसर कॉलोनी- 2
जमुनिया छीर- 3.50
एकांत पार्क- 2
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एनजीटी के आदेशों पर अमल किया जा रहा है। जलस्रोतों के आसपास के अधिकांश नालों को एसटीपी की ओर डायवर्ट कर दिया गया है। सीवेज नेटवर्क बिछाने का काम भी जारी है। बचे हुए शहर में अमृत-2 के तहत काम कराया जाएगा।
- केवीएस चौधरी, नगर निगम आयुक्त