
भोपाल. जूनियर डॉक्टर गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर, गाइड और सीनियर्स की बुलिंग का शिकार हो रहे हैं। हड़ताल में शामिल जूडा का कहना है कि हमें काम से समस्या नहीं है। पीजी करने से पहले ही 36 से 40 घंटे की ड्यूटी करने का मन बना कर आते हैं। मगर वर्क प्रेशर के दौरान बुरा व्यवहार हमें मानसिक रोगी बना रहा है। जो पहले गंभीर तनाव का शिकार बनाता है। बाद में सुसाइड करने के लिए मजबूर कर देता है।
जूडा ने बताई कैसे होती है ड्यूटी, क्या हैं मुख्य समस्या
एक जूडा ने प्रबंधन के खौफ की वजह से नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जब नाइट ड्यूटी लगती है तब लगातार तीन शिफ्ट करना पड़ती हैं। रूटीन डयूटी सुबह 9 बजे से शुरू होती है। इसमें ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच से लेकर उनके भर्ती होने तक की जिम्मेदारी दी जाती है। ओपीडी समय खत्म होने के बाद वार्ड में मरीजों के फॉलोअप के लिए जाते हैं। उनकी जांच, दवा देना, उन पर नजर रखना शामिल होता है। यह सब शाम 7 बजे तक चलता है। इसके बाद फिर नाइट शिफ्ट शुरू होती है। इस दौरान मरीजों की सारी जिम्मेदारी मौजूद जूडा पर होती है। फिर अगले दिन यह प्रक्रिया फिर शुरू होती है। जो दूसरे दिन शाम 7 से रात 10 बजे के बीच खत्म होती है। इस दौरान यदि सीनियर आएं और जूडा टॉयलेट भी गया हो तो उसे अपशब्द सुनने पड़ते हैं। किसी क्रिटिकल मरीज की मौत पर कहा जाता है कि तुम्हारी वजह से उसकी जान गई है। यह साइकोलॉजिकल तौर पर गहरा असर डालता है।
क्यों कह रहे कॉलेज है टॉक्सिक
तुमसे अच्छे अनपढ़
36 घंटे काम करने के बाद भी पीजी स्टूडेंट्स का मजाक बनाया जाता है। कहा जाता है कि तुमसे अच्छा काम तो बिना पढ़े लिखे लोग करते हैं।
हिंदी में गलती पर गाली
बोली भाषा पर मजाक बनाया जाता है। हिन्दी लिखने में गलती होने पर सजा दी जाती है। परिवार से मिले संस्कार पर मजाक बनाया जाता है।
न शादी करो, न बच्चे
शादी न करने को कहा जाता है। शादी कर ली, तो बच्चा पैदा नहीं करना। प्रेगनेंट होने पर इस सिम्पेथी गेम कहते हैं। बोला जाता है कि प्रोटेक्शन का इस्तेमाल नहीं कर सकती थी।
जो भी हाथ में मुंह पर दे मारा
सीनियर डॉक्टर्स गाली देने से लेकर जो हाथ में आए वो मुंह पर फेक देते हैं। यहां प्रताड़ना सहने नहीं पढ़ने और काम सीखने आए हैं।
जानवरों से भी बदतर व्यवहार
धमकी दी जाती है कि डिग्री 3 साल की जगह 5 साल में कंपलीट होगी। यह हमें जानवरों से भी बेकार समझते हैं।
डीन न अधीक्षक किसी को कुछ नहीं समझती डॉ. कुमार
कॉलेज के एक सीनियर प्रोफेसर के अनुसार कॉलेज काउंसिल की मीटिंग में डॉ. अरुणा कुमार ने हड़ताल के पीछे डीन, अस्पताल अधीक्षक और मेडिकल टीचर एसोसिएशन को जिम्मेदार बता दिया। डॉ. कुमार ने डीन को अपना जूनियर और अस्पताल के अधीक्षक को अपना अधीक्षक न मानने की बात कही। उनका खौफ इस कदर है कि सिर्फ पीजी स्टूडेंट्स नहीं बल्कि प्रोफेसर भी उनके सामने बोलने से डरते हैं। अब सबसे अधिक खतरे में गायनिक विभाग की वे छात्रा हैं, जो इस मामले में उनके खिलाफ खड़ी हुई हैं। उन्हें धमकियां मिल रही हैं कि उन्हें इसकी सजा मिलेगी, जो वे जिंदगी भर याद रखेंगी।
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Published on:
05 Aug 2023 12:42 am
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