23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कंबोडिया के मंदिर जीणोद्धार की तकनीक से एएसआई ने बटेश्वर में विष्णु मंदिर को दिया भव्य स्वरूप

बटेश्वर मंदिर समूह में अब तक का सबसे ऊंचा मंदिर को फिर से तैयार किया, 90 प्रतिशत पत्थरों को फिर से जोड़ा गया

2 min read
Google source verification
vishanu_mandir.jpg

भोपाल। बटेश्वर स्थित मंदिर समूह में अब तक के सबसे ऊंचे मंदिर को आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ) ने फिर से भव्य स्वरूप दिया है। 9वीं शताब्दी में बना ये विष्णु मंदिर अब तक वहां तैयार किए गए 80 मंदिरों में सबसे ऊंचा है। खास बात है कि इसके निर्माण में कंबोडिया के मंदिरों के जीर्णोद्धार में उपयोग की गई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एएसआई के विशेषज्ञों ने मशीनों का इस्तेमाल कर बैलेसिंग और इसके झुकाव के स्तर को बिल्कुल परफेक्ट बनाया। यहां पहली बार इस तरह की तकनीक का उपयोग किया गया। इससे कम समय में मंदिर का निर्माण भी हो पाया और अलाइमेंट भी मूल मंदिर की तरह ही रखा जा सका।

मठ का भी होगा निर्माण
करीब 9.5 मीटर ऊंचेऔर 7 मीटर चौड़ाई वाला यह मंदिर बटेश्वर में अब तक का सबसे ऊंचा मंदिर है। विष्णु मंदिर के साथ यहां एक मठ भी हुआ करता था। मंदिर के बाद अब मठ का निर्माण किया जाएगा। पिछले साल शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर करीब 3.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह राशि एक निजी कंपनी ने एएसआई को दी थी। एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज कुमार कुर्मी के अनुसार 90 प्रतिशत उन्हीं पत्थरों का उपयोग किया गया, जो मूल मंदिर के थे। 10 प्रतिशत पत्थर मिसिंग थे, तो उन्हें बाहर से लाकर जोड़ा गया, लेकिन इन पर किसी तरह की नक्काशी नहीं की ताकि मंदिर का मूल स्वरूप और प्राचीनता बनी रहे।

चार अन्य मंदिरों का भी होगा निर्माण
कुर्मी के अनुसार भगवान विष्णु और शिव से जुड़े करीब 200 में से 80 मंदिरों को फिर से तैयार किया जा चुका है। 4 नए मंदिरों के पुर्ननिर्माण भी प्रस्तावित है। इनमें से दो मंदिरों की ऊंचाई 7 से 8 मीटर होगी, जबकि दो मंदिर छोटे होंगे। अभी भी सैकड़ों मंदिर यहां मलबे में दबे हुए हैं, जिनका जीर्णोद्धार किया जाना शेष है।

भव्य हुआ करता था मंदिर समूह
कुर्मी के अनुसार मंदिर समूह वर्तमान से भी काफी भव्य था। तीन स्थानों पर खुदाई कर ये पता लगाया कि मंदिर कितने क्षेत्र में फैले हुए थे। 3 मीटर गहराई तक खुदाई की गई।इनका विस्तार वर्तमान परिसर से भी आगे और भव्य था, इसका मलबा एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। हालांकि, जमीन में अन्य किसी मंदिर के दबे होने के अवशेष नहीं मिले।