
DNA Test(photo:freepik)
DNA Test: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा बच्ची के डीएनए टेस्ट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने जबलपुर कुटुंब न्यायालय के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी डीएनए सैंपल देने से इनकार करती है, तो कुटुंब न्यायालय भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत प्रतिकूल अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र होगा। हाईकोर्ट ने माना कि यह साधारण मामला नहीं है। पति की ओर से पत्नी तक पहुंच न होने संबंधी ठोस दलीलें प्रस्तुत की गई हैं। ऐसे में सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए डीएनए टेस्ट आवश्यक है।
पत्नी ने कुटुंब न्यायालय के 18 अगस्त 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में पति की अर्जी स्वीकार करते हुए विवाह के बाद जन्मी बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए गए थे, ताकि पितृत्व की पुष्टि हो सके। पत्नी की ओर से तर्क दिया गया कि डीएनए टेस्ट से बच्ची की निजता और वैधता प्रभावित होगी तथा यह उसके हितों के खिलाफ है।
इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 के तहत वैधता की मजबूत धारणा को हल्के में नहीं तोड़ा जा सकता। पति ने अपने बचाव में तर्क दिया कि पत्नी ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है। वह सेना में है और इस अवधि में पत्नी से नहीं मिला।
पति की ओर से दलील दी गई कि पत्नी ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है। वह भारतीय सेना में पदस्थ है और गर्भधारण की अवधि के दौरान पत्नी से उसका मिलना संभव नहीं था। गर्भधारण की जानकारी चार दिन में मिलने और आठ माह में प्रसव जैसे तथ्यों को चिकित्सकीय रूप से असंभव बताया गया। इसी आधार पर डीएनए टेस्ट की मांग की गई थी, जिसे कुटुंब न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।
Updated on:
23 Jan 2026 11:25 am
Published on:
23 Jan 2026 11:22 am
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