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CBSE results 2019: मेरिट में गर्ल्स का कब्जा, ये हैं भोपाल के टॉपर्स

सिटी मेरिट में गर्ल्स का कब्जा टॉप-5 में से चार ह्यूमैनिटी से, CBSE : 15 मई को आने वाला 12वीं क्लास का रिजल्ट अचानक हुआ घोषित

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cbse class 12 topper bhopal

cbse class 12 topper bhopal

भोपाल, सीबीएसई ने गुरुवार को बारहवीं का रिजल्ट जारी कर दिया। सिटी गल्र्स ने इस बार लडक़ों को पछाडकऱ टॉप-5 में जगह बनाई है। सिटी टॉपर्स लिस्ट में टॉप-5 में चार गल्र्स हैं। वहीं, ह्यूमैनिटी सब्जेक्ट से चार स्टूडेंट्स ने टॉप किया। कॉमर्स के एक स्टूडेंट ने जगह बनाई है।

वहीं, स्कोरिंग माने जाने वाली साइंस स्ट्रीम से कोई भी स्टूडेंट टॉप-5 में जगह नहीं बना पाया। टॉपर्स ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए क्लासेस शुरू होने के पहले दिन से ही दो से तीन घंटे पढ़ाई की। एग्जाम प्रेशर को कम करने के लिए स्टडी रूम में एग्जाम सेंटर की तरह पेपर्स सॉल्व कर तैयार की।

क्लासेस पर फोकस कर प्रतिदिन रीवीजन कर बेसिक्स क्लियर किए। टॉपर्स का कहना है कि अच्छे मॉक्र्स लाने के लिए लंबे-लंबे उत्तर लिखने की बजाय महत्वपूर्ण प्वाइंट्स पर अंडरलाइन करे। इससे चेकर्स पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अब टॉपर्स की पसंद बना ह्यूमैनिटी

इस बार फिजिक्स और मैथ्स का पेपर काफी लेंदी था। इस कारण स्कोरिंग प्रभावित हुआ। पहले केवल औसत स्टूडेंट्स ही आट्र्स सब्जेक्ट का चुनाव करते थे, लेकिन अब करियर ऑप्शन होने के कारण टेन सीजीपीए वाले स्टूडेंट्स भी ह्यूमैनिटी पसंद कर रहे हैं। लॉ, फैशन डिजाइनिंग जैसे कोर्सेस में भी उन्हें अच्छे पैकेज मिल रहे हैं। इस कारण ट्रेंड बदल रहा है।

- चित्रा सुब्रहमण्यन, प्रिसिंपल, आईपीएस

10वीं एमपी बोर्ड से किया, अब हैदाराबाद विवि से सोशल साइंस की पढ़ाई करूंगी

मैंने दसवीं एमपी बोर्ड से 92.3 प्रतिशत से की। मुझे इंग्लिेश लिट्रेचर की पढ़ाई कर ऑथर या प्रोफेसर बनना है। इसलिए मैंने 11वीं में सीबीएसई स्कूल का चुनाव किया। मेरे पिता भेल से रिटायर्ड ऑफिसर हैं। मेरे साइंस में 100 माक्र्स थे। मम्मी चाहती थी कि मैं डॉक्टर बनुं। लेकिन जब मेरे निर्णय का फैमिली को पता चला तो सभी ने सहमति दे दी।

12वीं में इंग्लिश के साथ उर्दू, इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री और ज्योग्राफी सब्जेक्ट सिलेक्ट किए। इस बार इंग्लिश का पेपर समय कम पढऩे के कारण बिगड़ा। इस कारण 98 माक्र्स मिले। वहीं, हिस्ट्री और ज्योग्राफी में 100 माक्र्स आए। मैं प्रतिदिन दो घंटे ही पढ़ाई करती थी। हमेशा क्लास पर फोकस किया। विकली टेस्ट की भी हमेशा तैयारी करती रही।

घर आकर रीवीजन जरूर करती थी। मैंने यू-ट्यूब पर टॉपर्स के वीडियो देखे। उनसे यह जाना कि टॉप करने के फंडे क्या हैं। टीचर ने चेकर्स की पसंद जानी। एग्जाम में प्रजेंटेशन पर फोकस किया। आंसर की महत्वपूर्ण बातों को अंडरलाइन किया। मैं यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद से सोशल साइंस में बीए करूंगी।

1. जैनब सैफी
अंक : 98.6 प्रतिशत
स्कूल: डेमोस्ट्रेशन स्कूल, श्यामला हिल्स

सोशल मीडिया से क्लीयर किए डाउट, अब बिजनेसमैन बनने की ख्वाहिश

मेरे पिता छोटे सिंह आईएएस ऑफिसर हैं और जबलपुर में एडिशनल कमिश्नर के पद पर पदस्थ हैं। मुझे हमेशा से बिजनेस में ही रुचि थी। इसलिए मैंने कॉमर्स सब्जेक्ट का चुनाव किया। एग्जाम टाइम में अक्सर स्टूडेंट्स सोशल मीडिया से दूरी बना लेते हैं।

मैंने इसका इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया। मुझे कोई डाउट होता तो व्हाट्स ऐप पर दोस्तों से अपनी प्रॉब्लम शेयर करता। मैंने हमेशा स्टडी को सिंपल तरीके से करना पसंद किया। जब तक मेरा रोज का टारगेट नहीं पूरा हो जाता था मैं पढ़ाई बंद नहीं करता था। फाइनेंस मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है और आगे चलकर मैं इसी में एमबीए करूंगा। यदि शुरू से ही फोकस के साथ पढ़ाई की जाए तो मुश्किल राहें भी आसान हो जाती हैं।

2. सक्षम सिंह
अंक : 98.4 प्रतिशत
स्कूल: सेंट जोसफ को-एड स्कूल

सब्जेक्ट को अपना फेवरेट बनाएंगे तो बोरियत नहीं होगी

मेरा परिवार छिंदवाड़ा में रहता है। पिता बिजनेसमैन है। मुझे अपने आसपास घट रही घटनाओं को जानने में हमेशा से दिलचस्पी रही है। मुझे दसवीं में टेन सीजीपीए मिले। इसके बाद मैंने ह्यूमैनिटी सब्जेक्ट को चुना। ज्योग्राफी, मैथ्स और हिस्ट्री पसंदीदा सब्जेक्ट्स होने के कारण पढ़ाई करना आसान रहा। पहले दिन से ही तीन घंटे पढ़ाई की। हमेशा खुद को एक टीचर समझ पढ़ाई की।

तैयारी के बाद खुद से सवाल करती। ऐसे में सब्जेक्ट्स की बेसिक समझने में आसानी होती। हिस्ट्री में पूरे 100 माक्र्स मिले। पांच साल के पेपर्स सॉल्व किए। एग्जाम से पहले हॉस्टल में ही एग्जाम रूम का माहौल क्रिएट किया। इससे एग्जाम के दौरान टाइम मैनेजमेंट समझने के साथ ही स्ट्रेस से भी बची। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर ज्योग्राफी ऑनर्स की पढ़ाई करना चाहती हूं। मेरा सपना आईएएस ऑफिसर बनने का है।

3. पलक चौकसे
अंक : 98.2 प्रतिशत
स्कूल : डीपीएस, नीलबड़

मैथ्स के साथ ह्यूमैनिटी को चुना, आर्किटेक्ट फील्ड में बनाऊंगी करियर

मेरे पापा राकेश सिंह और मम्मी रीना कुशवाह दोनों आर्किटेक्ट हैं। मैंने 9वीं में ही तय कर लिया था कि मुझे भी आर्किटेक्ट बनना है लेकिन मुझे ह्यूमैनिटी भी उतना ही पसंद था। मैंने ऑप्शनल के रूप में मैथ्स और एडिशन सब्जेक्ट के रूप में पेंटिंग लिया था। सभी का मानना है कि आट्र्स और मैथ्स का कोई को-रिलेशन नहीं है, लेकिन

मेरा मानना है कि ह्यूमैनिटी के साथ मैथ्स को समझना ज्यादा आसान है। मैंने यूके और यूएस की कई यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया है। दो से ऑफर भी आ गया है। मैं रेस्टोरेशन ऑफ आर्किटेक्ट के माध्यम से अपने मॉन्यूमेंट्स को संरक्षित करना चाहती हूं। मैं किसी भी उत्तर को रटती नहीं थी। बुक से आइडिया को समझ कर उसे याद करती थी। मैं मैथ्स को दो से तीन घंटे रोजाना देती थी, क्योंकि मैथ्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट है।

4 रेवा कुशवाह
अंक : 98.00 प्रतिशत
स्कू ल : डीपीएस,
नीलबड़

नौवीं तक एवरेज स्टूडेंट्स थी, मेहनत से किया टॉप

नौवीं तक मैं एवरेज स्टूडेंट थी। बचपन का सपना डॉक्टर बनने का था। मैंने पहले बायो सब्जेक्ट लिया, लेकिन मुझे कुछ समझ ही नहीं आता था। जून तक तो मैं डिप्रेशन में चली गई। मैंने सब्जेक्ट बदलकर कॉमर्स लिया, लेकिन इसमें भी मेरा दिल नहीं लगता था। पिता ने करियर काउंसलर की मदद ली। मुझे लगा कि मैं आट्र्स में भी बेहतर कर सकती हूं।

हालांकि उस समय तक मेरी इंग्लिश भी ज्यादा स्ट्रॉग नहीं थी। दोस्तों ने भी कहा कि तुम तो टॉप से बॉटम में पहुंच गई हो। मैंने खूब मेहनत की। एग्जाम के समय केवल पंद्रह मिनट का ब्रेक लेती थी। रात को भी दो से तीन घंटे ही सोती थी। आगे दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करना चाहती हूं ओर सिविल सर्विसेज की फील्ड में आगे बढ़ाना चाहती हूं।

5. मुस्कान राठौर
अंक : 97.80 प्रतिशत
स्कूल : डीपीएस, कोलार

आईपीएस : 30 को 90% से ज्यादा अंक

इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल (आईपीएस) का हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रेष्ठ परिणाम रहा है। एग्जाम में शामिल 149 में से लगभग 30 परिक्षार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। छात्रा अनुष्का धीर ने कला संकाय में और छात्र लक्ष्य बांग ने विज्ञान संकाय में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं।

जूही विश्वकर्मा ने विज्ञान संकाय में 96.2 प्रतिशत लाकर सेकंड, नवनिका ङ्क्षसह ने कला संकाय में 96 प्रतिशत लाकर तीसरा स्थान हासिल किया है। प्राचार्य का कहना है कि इसमें शिक्षकों की सुनियोजित, व्यवस्थित और सतत शिक्षण प्रणाली का बड़ा योगदान है।

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