
भोपाल। इस चार दिवसीय छठ पूजा महोत्सव की शुरुआत 24 को नहाए खाए व्रत के साथ हुई। यह महोत्सव 27 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत 26 और 27 अक्टूबर को भोजपुरी समाज के छठ व्रतधारियों द्वारा घाटों पर एकत्रित होकर डूबते और उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा। इस दौरान सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
वहीं इस मौके पर कई लोग अपने घर पहुंच चुके हैं। साल में दो बार मनाया जाने वाले इस त्योहार को मन्नतों का त्योहार भी कहा जाता है। छठ पूजा के पहले दिन छठ पूजा नहाय खाय होती है। इस दिन लोग अपने घर की साफ सफाई करने के बाद सूर्य उदय के पश्चात नदी, तालाब, पोखर या नहर, कुंआ आदि में स्नान करने जाते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को माता सीता ने भी किया था। कहीं कहीं लोक कथाओं में कहा जाता है कि इस व्रत को द्रोपदी ने भी किया था। इस शुभ मौके पर मां छठी मैया और सूर्य देवता की उपसना की जाती है।
इस त्योहार को पारंपरिक तौर तरीके से मनाया जाता है। वहीं इस दौरान पूरी तरह से भक्ति में डूब जाने के लिए संगीत का सहारा भी लिया जाता है। तो यहां हम आपको बता रहे हैं छठ पूजा के मौके पर सुनने वाले लोकप्रिय गानों के बारे में जो इस प्रकार हैं...
उग हे सूरजदेव अरघ के बेरिया...दर्शन देहू न अपार हे दीनानाथ...मरबो रे सुगवा धनुष से..कांचही बांस के बहंगिया...महिमा बा अगम अपार हे छठ मइया...छठ महापर्व के ये पारंपरिक गीत आज भी बज रहे हैं। इनकी मांग जितनी कल थी आज भी है। छठ व्रती इन्ही छठ गीतों को गाते हुए घाटों पर अर्घ्य देने जाते हैं।
1. हो दीनानाथ तक, -भोजपुरी छठ गीत
2. हे छठी मैया, - छठ पूजा गीत
3. केलवा के पात पर, -छठ पूजा गीत
4. उथौ सूरज भाल बिहान, -छठ पूजा गीत
5. पहाली पहल छठी मैया, -छठ पूजा गीत
— पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार. करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार. सब के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार. पिया के सनईहा बनईहा, मईया दिहा सुख-सार. नारियल-केरवा घोउदवा, साजल नदिया किनार. सुनिहा अरज छठी मईया, बढ़े कुल-परिवार. घाट सजेवली मनोहर, मईया तोरा भगती अपार. लिहिएं अरग हे मईया, दिहीं आशीष हजार. पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर. करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार.
6.तोहे बड़का भैया हो, -छठ गीत
7. शाम खेले चलेली, -छठ पूजा
8. उगीहीन सूरज गोसाईयन हे, -छठ पूजा
9. बानजी केवदवा धैले थाद, -छठ पूजा
10. ग्राम के अधिकारी तोहरे छुटका भैया, -छठ गीत
इस त्योहार पर पारंपरिक भोज से लेकर पूजा भी प्राचीन संस्कृति जैसी की जाती है। खास बात ये है इस पर्व पर लोक गीत गाए जाते हैं। ये लोक गीत गांव या समाज की महिलाएं मिलकर गाती हैं और फिर इन गीतों पर लोग खूब थिरकतें हैं. वैसे तो भोजपुरी, मैथेली, अवधी कई भाषाओं में छठ मैया के गाने गाए जाते हैं।
Updated on:
25 Oct 2017 03:20 pm
Published on:
25 Oct 2017 01:59 pm

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