
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अतिथि विद्वान और अतिथि व्याख्याता भी वही योग्यता रखते हैं जो हमारे लेक्चरर, प्रोफेसर्स और व्याख्याता रखते हैं। हमने सोचा है कि आपके जीवन से अनिश्चितता समाप्त की जाए। चौहान ने कालेज के अतिथि विद्वानों, अतिथि व्याख्याता एवं तकनीकी महाविद्यालयों के व्याख्याता, आईटीआई और इंजीनियरिंग के अतिथि शिक्षकों को कई सौगात देने की घोषणा कर दी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उज्जैन से लौटने के बाद सीएम हाउस में अतिथि विद्वानों और अतिथि व्याख्याताओं की पंचायत में संबोधित कर रहे थे। चौहान ने एक किस्सा बताया, जिसमें दो बहनों ने भावुक होकर मुझे अपनी समस्या बताई थी। मैं एक बार कालेज भवन का उद्घाटन किया, तो मेरी बहनों ने मुझसे मिलने की कोशिश की। जब चाय पीने प्रिंसिपल के कमरे में गया तो इन दोनों को बुलाकर कहा था कि मैं आपकी आंखों में आंसू नहीं रहने दूंगा।
चौहान ने कहा कि सभी शासकीय महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि विद्वानों को अब कार्य दिवस की बजाय सीधे-सीधे मासिक वेतन दिया जाएगा और वो पचास हजार रुपए तक का होगा। इसमें तकनीकी वाले भी अपने आपको शामिल मानें और शासकीय सेवकों के समान आपको अवकाश की सुविधा भी दी जाएगी। एक अकादमिक सत्र में अपने महाविद्यालय के स्थान पर आपके मनचाहे महाविद्यालय में ट्रांसफर की सुविधा भी दी जाएगी।
चौहान ने कहा कि फालएन आउट को भी इन किया जाएगा। उन्हें फिर से रिक्त पदों पर आमंत्रण देंगे। हमारी जिंदगी में और निश्चितता आए, इसलिए कुछ कदम और उठाना जरूरी है। आप जानते हैं कि यूजीसी की गाइडलाइन के कारण कुछ दिक्कतें हैं, उसमें से भी रास्ता निकाल रहे हैं। एक तो अतिथि विद्वानों और व्याख्याताओं के लिए अभी यह व्यवस्था नहीं हैं मैं पीएससी में संशोधन कराकर 25 प्रतिशत आरक्षण पद आरक्षित करूंगा। इसमें कुछ फेरबदल करना पड़ेगा, इसके मैं निर्देश दूंगा। अभी मैं प्रतिवर्ष 4 और अधिकतम 20 नंबर दिए जाते हैं। और पेपर 900 का होता है, इसलिए यह थोड़ा कम रख रहा हूं। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे, जिससे अधिकतम शामिल हो सके।
चौहान ने कहा कि अब कोई भी अतिथि विद्वान जो लगातार पढ़ाने का काम कर रहा है, उसे बाहर नहीं किया जाएगा। इतना बड़ा प्रदेश है हमारा, देश का दिल है मध्यप्रदेश। अरे चार साढ़े चार हजार लोगों को तो अपने दिल में समा ही सकता है। इसलिए अब ऐसी व्यवस्था बनाए कि अब हम फालएन आउट की नौबत ही नहीं आए। आईआईटी वाले भी बैठे हैं, उनके लिए भी यह सभी लागू होगी। अतिथि प्रवक्ता भी है उनको भी 14 से बढ़ाकर 20 हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में पिछले 20 वर्षों से कार्यरत अतिथि विद्वान लंबे समय से नियमितिकरण और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे थे।
Updated on:
11 Sept 2023 06:37 pm
Published on:
11 Sept 2023 03:56 pm
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