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भोपाल. मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बुधवार को एयरपोर्ट रोड स्थित ऑल सेंट स्कूल का औचक निरीक्षण किया गया। करीब 11.30 बजे आयोग की टीम स्कूल संस्थान पहुंची तो कॉलेज प्रबंधन द्वारा करीब पंद्रह मिनट तक तमाम बातों में उलझाए रखा। जिसके बाद टीम जब स्कूल के मेन गेट पर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला, जिसे खोलने स्कूल प्रबंधन को करीब दस मिनट का समय लगा।
इस दौरान मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र शर्मा ने स्कूल प्रबंधन से जिम्मेदार अधिकारी को बुलाने की बात कहीं तो सभी मौजूद कर्मचारी एक दूसरे का चेहरा देखते रहे। वहीं शिक्षिका से बच्चों की कम उपस्थिति की जानकारी व रजिस्टर मांगा तो उन्होंने यह कहते हुए टाल दिया कि रजिस्टर रिकार्ड रूम में रखा है जिसकी चाबी चपरासी के पास है और वह १२ बजे घर चला जाता है। जिसके बाद उन्होंने स्कूल प्रबंधन को तीन दिनों के अंदर सभी दस्तावेज की प्रतिलिपि जिला शिक्षा कार्यालय में भेजने का आदेश दिया है।
छात्रों को ही नहीं पता प्रिंसिपल का नाम
निरीक्षण के दौरान कुछ बच्चों ने बताया कि टीचर द्वारा होमवर्क बहुत अधिक दिया जाता है, वहीं पूरा नहीें होने के कारण सजा के रूप में टीचर घंटों तक खड़ा रखती हैं। छात्रों से जब उनके स्कूल पिं्रसिपल का नाम पूछा गया तो किसी भी बच्चे को उनका नाम नहीं पता था। छात्रों ने बताया किसी तरह की परेशानी होने पर जब वह शिकायत करने जाते हैं तो उनसे एक फॉर्म फिल कराया जाता है जिसमें बच्चे का नाम, कक्षा, मोबाइल नंबर, पता आदि की जानकारी भरना जरूरी रहता है। कक्षा में ४० प्रतिशत उपस्थिति होने के कारणों के बारे में बच्चों ने बताया कि कुछ बच्चों की फीस जमा नहीं होने के कारण उन्हें स्कूल नहीं आने का आदेश दिया गया है।
स्कूल का पक्ष रखने आया वकील निकला स्कूल का कर्मचारी
बीते वर्ष ३० मई को ऑल सेंट स्कूल की एक अन्य शिकायत में आवेदक इरफान खान ने बताया कि उनका आठ वर्षीय पुत्र स्कूल में कक्षा तीसरी में पढ़ता था। बच्चे की अचानक तबियत खराब होने के कारण वह करीब एक महीने तक स्कूल नहीं जा सका। इसकी सूचना स्कूल प्रबंधन को पत्र द्वारा दे दी गई थी। बच्चा स्वस्थ होकर जब १६ अगस्त को स्कूल गया तो स्कूल प्रबंधन ने उसे टीसी पकड़ा दिया। इस केस में आयोग की संयुक्त बेंच के समक्ष स्कूल का पक्ष वकील द्वारा रखा गया जिसे निरीक्षण के दौरान देख आयोग की टीम ने जानकारी मांगी तो वह स्कूल का ही कर्मचारी निकला।
स्कूल प्रबंधन ने नहीं दिखाए यह दस्तावेज
- बच्चों का अटेंडेंस रजिस्टर
- स्कूल का स्टाफ रजिस्टर
- स्कूल संबंधी दस्तावेज
- फीस का बाइफरकेशन
- स्कूल कर्मचारियों का नाम और उनका कार्यक्षेत्र
- शिकायत करने वाले फार्म की जानकारी
स्कूल में कोई जिम्म्मेदार व्यक्ति नहीं, बच्चों का भविष्य संकट में
निरीक्षण में मिले चौंकाने वाले परिणाम पर चिंता जाहिर करते हुए बाल आयोग सदस्य ब्रजेश चौहान का कहना है कि राजधानी में यह पहला मामला देखने में आया है कि स्कूल टाइम में न तो प्रिंसिपल संस्थान में उपस्थित है और न ही वाइस पिं्रसिपल। बच्चों का भविष्य एेसे शिक्षकों के भरोसे है जो स्वयं के दायित्य ही नहीं जानते हैं। स्कूल ने शिक्षा के अधिकार की धारा १६ व १९ का उल्लंघन किया है। जिसके लिए जिला प्रशासन को स्कूल का एनओसी रद्द करने के लिए पत्र लिख दिया है। वहीं सीबीएसई, अजमेर को स्कूल की मान्यता रद्द करने का पत्र लिख दिया गया है। बीते वर्ष प्राप्त शिकायत में संयुक्त बेंच के समक्ष स्कूल का पक्ष रखने आए वकील स्कूल का कर्मचारी निकला। इसकी जांच आयोग द्वारा की जाएगी और सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज कराया जाएगा। वहीं आयोग की २७ अप्रैल को आयोजित संयुक्त बेंच में स्कूल के जिम्मेदार अधिकारी को बुलाया जाएगा।
Published on:
12 Apr 2018 11:49 am
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