‘लाड़ली लक्ष्मी’ भी नहीं बचा पा रही प्रदेश की बेटियां

शिवराज सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर भी अब सरकार सवालों के घेरे में है। दरअसल जिम्मेदार दावा करते रहे हैं कि सरकार की ये योजना सफलता पूर्वक लागू की गई है। अगर ऐसा होता तो बेटियां कम कैसे हो रही हैं?

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Jan 07, 2017
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भोपाल। कई योजनाओं के बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री बेटियों की जिंदगी बचाने में नाकाम रहे हैं। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की ओर से जारी एसआरएस 2015 रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बेटियों की संख्या लगातार कम हो रही है।

950 का लक्ष्य फेल 914 पर आया अनुपात

11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राज्य सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश में शिशु लिंगानुपात का अंतर कम किया जाएगा। ये 932 से बढ़ाकर 950 तक करने का लक्ष्य तय किया गया।

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पर हुआ उल्टा, प्रदेश में बेटियों की संख्या जितनी थी उससे भी कम हो गई। ये लिंगानुपात का ये अंतर 932 से भी नीचे आ गया। अब ये संख्या 914 पर आस टिकी है।

महत्वकांक्षी योजनाएं भी नहीं आईं काम

* शिवराज सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर भी सवाल अब सरकार सवालों के घेरे में है। दरअसल जिम्मेदार दावा करते रहे हैं कि सरकार की ये योजना सफलता पूर्वक लागू की गई है। अगर ऐसा होता तो बेटियां कम कैसे हो रही हैं?
* यह खुलासा 12वीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज में हुआ है। जिसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि लाड़ली लक्ष्मी, मुफ्त शिक्षा, भ्रूण हत्या के मामलो में सख्ती बरती जा रही है।
Published on:
07 Jan 2017 03:50 pm
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