
भोपाल@ बच्चों में फोन की लत का होना स्वाभाविक है। और इसके लिए काफी हद तक परिजन भी जिम्मेदार है। क्योंकि जब बच्चा रोता है तो उसे चुप करवाने के लिए परिजन फोन में गेम चलाकर उसे दे देते हैं। लेकिन उसे चुप कराने की ये आदत कब बच्चों की लत बन जाती है इसका अहसास परिजनों को भी नहीं होता है। दरअसल कोरोनाकाल के ऐसे मामलों में वृद्धी हुई है। और हैरानी की बात ये है कि जब बाद में परिजन बच्चों के ज्यादा फोन इस्तेमाल पर पाबंदी लगाते हैं तो बच्चे आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम तक उठाने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे बढ़ते मामलों को लेकर बाल आयोग ने चिंता प्रकट करते हुए एक पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया है। जिसको लेकर एक्सपर्ट से लगातार मंथन चल रहा है।
बच्चों के साथ परिजनों की भी होगी काउंसलिंग
दरअसल एक्सपर्ट का मानना है कि इस गलती के लिए बच्चों से ज्यादा परिजन जिम्मेदार है। क्योंकि बच्चों को फोन की लत लगाने के पीछे कहीं न कहीं परिजन ही जिम्मेदार है। अगर परिजन बचपन से इसको लेकर जागरूक हो तो काफी हद तक ऐसे मामलों से बचा जा सकता है। ऐसे में बाल आयोग की प्लानिंग है कि बच्चों के साथ परिजनों की भी काउंसलिंग करवाने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेशभर में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
दरअसल इसको लेकर बाल आयोग प्रदेशभर में जागरूता अभियान चलाने की योजना बना रहा है। ये जागरूकता अभियान सभी जिला मुख्यालयों में चलाए जाएंगे। जिसमें एक्सपर्ट के साथ विभिन्न लोग शामिल होंगे जो बच्चों के साथ परिजनों को भी बताएंगे की जब बच्चे फोन का उपयोग करें उसमें चाइल्ड फिल्टर और चाइल्ड प्रोटेक्शन एप का इस्तेमाल करें।
जिम्मेदार ये बोले-
कोरोना के बाद ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आयोग के पास भी ऐसे कई मामले पहुंचे हैं। जिसको लेकर हम प्रदेशव्यापी पॉलिसी बनाने की योजना बना रहे हैं। इसको लेकर एक्सपर्ट से भी मंथन चल रहा है।
अनुराग पांडे, सदस्य, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग
Published on:
13 Jul 2023 07:13 pm
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