
डॉ. विक्रम बाथम
भोपाल। अगर मन में जुनून और कुछ कर गुजरने का अरमां होतो व्यक्ति क्या नहीं कर सकता है। कुछ ऐसा ही कर रहे है शहर के चार डॉक्टर्स। जो फिटनेस के लिए 70 से अधिक उम्र में भी स्वीमिंग कर रहे हैं और नेशनल के लिए स्टेट टीम में जगह बना रहे हैं। वे अस्पताल के व्यस्त शैड्यूल से थोड़ा से अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं, जिसके लिए वे रोज एक घंटे तैराकी करते थे, लेकिन आज उनका सिलेक्शन पहली बार नेशनल मास्टर्स स्वीमिंग चैंपियनिशप के लिए हुआ है।
जिससे वे आज अपने हम उम्र लोगों के लिए एक मिशाल बनकर सामने आए हैं। इन डॉक्टर्स ने अपनी लाइफ और स्वीमिंग में जुनून को पत्रिका से साझा किया। टीम के कैप्टन बने डॉ. केसी रायकवार 1974 में छोटे तालाब में गोते लगाते थे, 1975 में स्कूल नेशनल चैंपियन बने। उन्होंने अभी तक 43 गोल्ड समेत 90 मेडल जीते हैं।
स्वीमिंग के अलावा हॉकी व फुटबॉल में उस्ताद
71 साल के डॉ. पीके शर्मा शुरू से ही फिटनेस के लिए स्वीमिंग करते आ रहे हैं। अस्पताल जाने से पहले सुबह सात बजे उठकर अरेरा क्लब निकल जाते हैं। जिससे उनकी स्वीमिंग की टाईमिंग अच्छी होने लगी और उनका चयन मास्टर्स स्वीमिंग के लिए हुआ। वे कहते हैं कि मुझे खुशी है कि मैं पहली नेशनल स्वीमिंग खेलने जाऊंगा, मुझे उम्मीद है कि मैं इस चैंपियनशिप में पदक जीत पाऊंगा। शर्मा 1971 में नेशनल हॉकी खेल चुके हैं। इतना ही नहीं 1966 में यूनिवर्सिटी और 1968 में यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में कप्तान की भूमिका निभा चुके हैं।
40 साल से कर रहे हैं स्वीमिंग और साइक्लिंग
74 साल के डॉ. वीके भारद्वाज भी फिटेनस के लिए 40 साल से काम कर रहे हैं। वे अपने अस्पताल में पैसेंट्स को देखने के बाद थोड़ा समय अपनी फिटनेस पर भी देते हैं। एक घंटे साइक्लिंग करना उनका आदत है वहीं वे सुबह छह बजे से स्वीमिंग में गोते लगाने उतर जाते हैं। रक्त रोग विशेषज्ञ भारद्वाज कहते हैं स्वीमिंग करते समय में मेरे दोस्तों ने मुझे प्रमोट किया था, जिससे मेरी स्वीमिंग की टाइमिंग अच्छी होती गई और मुझे पहली बार नेशनल मास्टर्स के चुना गया। वे इस चैंपियनशिप में 50 मीटर बैक स्ट्रोक में मप्र टीम से खेलेंगे।
विक्रम ने स्वीमिंग में जीते हैं 70 गोल्ड
55 साल के डॉ. विक्रम बाथम को 1978 से स्वीमिंग का जुनून चढ़ गया था। उन्होंने स्कूल लेवल से ही स्वीमिंग कॉम्पीटिशन में भाग लेना शुरू कर दिया था। इस दौरान वे एथलेटिक्स में भी माहिर रहे। फिर एमबीबीएस की स्टडी के दौरान इन खेलों से दूरियां बढ़ती गईं, लेकिन अस्पताल से समय निकालकर शाम को स्वीमिंग करने जाते रहे।
25 साल की उम्र में उन्हें मास्टर्स स्वीमिंग चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिलता रहा। जिसके बाद उन्होंने अभी तक 70 गोल्ड और 35 सिल्वर मेडल अपने गले में पहन चुके हैं। इनका सिविल सर्विस स्वीमिंग में गोल्ड और सिल्वर मेडल है। वे नेशनल मास्टर्स में चार स्पर्धाओं में अपनी भागीदारी करेंगे।
Published on:
10 Oct 2018 02:43 pm
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