
राज्य निर्वाचन आयोग की सख्ती
भोपाल। राज्य सरकार भले ही कर्मचारियों को 62 वर्ष तक काम के लिए फिट मान रही हो, लेकिन आयोग इन कर्मचारियों को चुनाव कराने के लिए उपयुक्त समझता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए कि 60 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगाई जाए। राज्य सरकार के कर्मचारियों से अगर मतदानकर्मियों की पूर्ति नहीं हो पा रही है तो केन्द्र शासन, बैंक, भारतीय जीवन बीमा सहित अन्य केन्द्रीय संस्थाओं के कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं। अगर इसके बाद भी मतदानकर्मियों की कमी होती है तो तीन वर्ष से अधिक सेवा वाले संविदा कर्मियों की सेवाएं ली जा सकेंगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने महिला मतदानकर्मियों को वोटिंग शुरू होने की पूर्व संख्या में मतदान केन्द्रों पर पहुंचने की अनिवार्यता से छूट दे दी है। महिलाओं को मतदान शुरू होने से एक घंटे पहले मतदान केन्द्रों पर पहुंचना होगा। उनकी ड्यूटी भी उसी ब्लाक में लगाई जाएगी, जिस ब्लाक में वो नौकरी कर रही हैं। कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी रेंडमाइजेशन के आधार पर लगाई जाएगी। जबकि न्यायिक सेवा के सभी अधिकारी, कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।
इसके अलावा जो कर्मचारी जैसे- जल प्रदाय, परिवहन, विद्युत, दुग्ध प्रदाय,आबकारी, वाणिज्यिक कर सहित अन्य आवश्यक सेवा देने वाले कर्मचारियों को चुनाव और मतगणना की ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा। वहीं सहकारी संस्थाओं, कृषि उपज मंडी, के कर्मचारियों को पीठासीन अधिकारी नहीं बनाया जाएगा। किसी भी विकास खंड के अंतर्गत पदस्थ किसी भी कर्मचारी, अधिकारी को उस विकास खंड के मतदान केन्द्रों पर पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। मतदान के दौरान बीस फीसदी अतिरिक्त मतदानकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
Published on:
14 Dec 2021 08:38 pm
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