
भोपाल। उमा भारती पर पथराव के 20 साल पुराने मामले में आज सुनवाई पूरी हो चुकी है्। सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 14 मार्च को फैसला आएगा। 20 साल पुराना ये मामला 1998 लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ था, जब उमा भारती के काफिले पर पथराव और फायरिंग कर हमला किया गया था। मामले में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 3 लोगों की मौत अब तक हो चुकी है।
वर्ष 1998 में वर्तमान केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमाभारती संसदीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से खजुराहो सीट की प्रत्याशी थीं। 27-28 फरवरी 1998 में वे टीकमगढ़ से छतरपुर होते हुए मैहर दर्शन के लिए जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें बसारी गांव में लगभग आधा सैकड़ा लोगों ने घेर लिया। ड्राइवर ने किसी तरह से उमा भारती को वहां से निकाल लिया।
उनका वाहन जब बमीठा पहुंचा तब उनके पीछे एक अन्य वाहन लगा था। इस वाहन ने उमा भारती के वाहन को पन्ना मार्ग पर स्थित चंद्रनगर में ओवरटेक किया और वाहन में बैठे लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। इस मामले में वर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित सत्रह लोगों पर दो प्रकरण पंजीबद्ध किए गए थे।
लगभग 17 वर्ष से विचाराधीन इस मामले में बयान देने के लिए शुक्रवार को उमाभारती छतरपुर पहुंची। उन्होंने न्यायाधीश के समक्ष खुलकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर आरोप लगाए और कहा कि उनके इशारे पर ही लोकसभा चुनाव के दौरान हमला किया गया था।
केंद्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती शुक्रवार को छतरपुर के अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में दो वर्ष पहले पेश भी हुईं थीं। उन्होंने न्यायाधीश के सामने अपने बयान में हमला करने वाले कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह मुन्नाराजा का नाम लिया था, इसके अलावा उन्होंने घटना से संबंधित पूरी जानकारी जज को बताई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान उमा भारती के वाहन पर मैहर जाते समय छतरपुर के बमीठा में फायरिंग की गई थी। हमले में उमा भारती बाल-बाल बच गईं थीं।
Updated on:
08 Mar 2018 12:35 pm
Published on:
08 Mar 2018 11:13 am
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