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इस नेता ने देखा था पुलिस किसान को पीट रही थी और वो मर रहा था…

..विधानसभा में मंगलवार को किसानों के मुद्दे पर  स्थगन प्रस्ताव पर 6 घंटे की चर्चा के बीच मंदसौर-सुवासरा से कांग्रेस विधायक ने यह दावा किया कि वे मंदसौर गोलीकांड के प्रत्यक्षदर्शी थे। उन्होंने बताया कि उस दिन किसान कैसे पुलिस की गोलियों के शिकार बने। वहीं सीएम ने सदन में ही स्पष्ट किया कि उन्होंने सख्ती बरतने का निर्देश नहीं दिया।

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sachin gupta

Jul 19, 2017

bhopal

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भोपाल. कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह दंग ने विधानसभा में कहा- सदन में केवल मैं ही मंदसौर घटना का प्रत्यक्षदर्शी हूं। मैं बताता हूं सच क्या था। पिपलियामंडी में व्यापारियों और किसानों में विवाद का वीडियो वायरल हुआ था। वहां के टीआई अनिल सिंह इसके बाद किसानों के बीच पहुंचे और बोले- हमारी फोर्स आ गई है। दम हो तो अब कुछ करके दिखाओ। आंदोलनकारी किसानों में इससे गुस्सा था। 6 जून को जब 12.15 बजे 17 साल का अभिषेक दुकान पर खड़ा बीड़ी पी रहा था, तो उसकी छाती में गोली लगी। वह पलटा तो दूसरी गोली पीठ में लगी। चैतराम जिसकी शादी को एक महीना सात दिन हुए थे, उसे गोली मार दी गई। एसपी-कलेक्टर नहीं चाहते थे कि मृतकों के पोस्टमार्टम की निजी स्तर पर वीडियोग्राफी हो, लेकिन परिजन के दबाव के बाद उन्हें झुकना पड़ा। इसीलिए अगले दिन एसपी-कलेक्टर को बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा कि गोली पुलिस ने ही चलाई।

अगर निजी वीडियोग्राफी नहीं होती तो पुलिस कभी भी गोली चलाने की बात स्वीकार नहीं करती। दंग बोले- 8 जून को घनश्याम को पुलिस पकड़कर ले गई। एक दर्जन लोगों के नामों का हवाला देते हुए दंग ने कहा, उनके सामने पुलिस ने घनश्याम को लाठी से पीट-पीटकर मार दिया। फिर उसे इंदौर रेफर कर दिया, जबकि पहले ही दम तोड़ चुका था। ये शर्मनाक है। विधायकों की समिति बनाकर जांच कराई जाए तो सच सामने आ जाएगा। पोस्टमार्टम में जो गोली निकली, उसका नम्बर देखकर पता कराइये कि किस पुलिसवाले को इशु हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह ने टोकते हुए कहा- मैं खुद एसपी रह चुका हूं। गोली का कोई नंबर नहीं होता। तब कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह ने कहा- कारतूस की गिनती कराइए। पता चल जाएगा किस पुलिसकर्मी के कारतूस कम हैं।

बचाव के लिए पुलिस ने चलाई गोली : गृहमंत्री
वि पक्ष के आरोपों पर गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सदन में कहा- हमने किसानों पर सख्ती नहीं की, इसलिए 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश थे कि किसानों पर सख्ती नहीं की जाए। वाहनों में तोडफ़ोड़, आगजनी और पुलिस पर पथराव तथा जानलेवा हमले तथा आंदोलनकारियों के बलवे को रोकने के प्रयास में गोली चली।

सीएम ने कहा- मैंने सख्ती के आदेश नहीं दिए
सदन में जब कांग्रेस विधायकों ने बार-बार कहा कि सीएम ने आंदोलन में सख्ती से निपटने के निर्देश दिए थे, तो सीएम ने कहा कि यह पूरी तरह गलत है। मैंने कभी भी सख्ती से निपटने के आदेश नहीं दिए। बाद में गृह मंत्री ने भी सीएम की इस बात का समर्थन किया।