
भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेताओं ने मिशन 2018 पर फतह करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, इसे लेकर कांग्रेस दो मोर्चों पर तैयारी में जुटी हुई है। तैयारी के एक हिस्से के तहत जहां पीसीसी रोड मैप बनाने में जुट गई है। वहीं दूसरे हिस्से की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
मोदी के लिए संकट : दरअसल पीएम मोदी द्वारा लागू की गई नई योजना चाहे नोटबंदी हो या जीएसटी हर स्थिति को लेकर कई लोगों में नाराजगी भी व्याप्त है। ऐसे में ऐसा प्रदेश जो लंबे समय से भाजपा का गढ़ बना हुआ है और जहां कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है। वहां चुनाव मेें कांग्रेस की वापसी या मजबूत होना जहां एक ओर पीएम मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े कर देगा वहीं कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को भी तोड़ सा देगा।
दरअसल इस पूरे MP चुनाव में पीएम मोदी की साख एक तरह से दांव पर रहेगी। यानि यदि जनता ने भाजपा को नकार दिया तो यह पीएम मोदी के लिए सबसे बड़े संकट का कारण होगा, जिससे यह दिखेगा कि जनता ने उनकी नीतियों को पूरी तरह से नकार दिया है।
एक तरफ जहां कांग्रेस नेता मध्यप्रदेश में जगह जगह दौरे करेंगे, वहीं दूसरे हिस्से की तैयारी के तहत कांग्रेस भाजपा की ही एक रणनीति में ही थोड़ा और सुधार कर अपनी रणनीति का दूसरा हिस्सा तैयार कर रही है। जानकारों के अनुसार कांग्रेस की इस रणनीति से पीएम मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं यदि इस पूरे कार्यक्रम में कांग्रेस सफल होती है तो बीजेपी के मिशन 2018 को बड़ा झटका लग सकता है।
वहीं यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पार्टी अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता ज्यादा दिखाई देना शुरू हो जाएगी।
बीजेपी का मिशन 2018 फेल करने के लिए ये है रणनीति:
1. एक हिस्से में जहां कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के लिए रोड मैप तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभाएं व सम्मेलन कर जनता से जुड़ने का कार्य करेंगे।
2. वहीं रणनीति के एक अन्य हिस्से के तहत कांग्रेस जल्द ही 25 हजार पदों पर युवाओं को रखने जा रही है। इसके लिए कांग्रेस ने जिले और प्रदेश स्तर पर कई लोगों को पद देने का जिम्मा दे दिया है।
रणनीति का एक हिस्सा
पहली रणनीति के तहत सूत्रों का कहना है कि जनवरी से प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के प्रदेश में दौरा करने की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके लिए एआईसीसी दिग्गज नेताओं की मर्जी से रोड मैप तय कर रही है। यह भी माना जा रहा है कि इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश भर में अलग-अलग दौरे करेंगे।
इसमें कुछ स्थानों पर इनकी सभाएं होंगी तो कहीं कार्यकर्ता सम्मेलन होंगे। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसा ही रोड मैप पीसीसी में भी बनाया जा रहा है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव भी जिलों में जाकर कार्यकर्ता सम्मेलन करेंगे।
रणनीति का दूसरा हिस्सा:
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस इस बार भाजपा के ही समीकरण को अपनी टीम में लागू करने जा रही है। दरअसल पिछले दिनों भाजपा द्वारा जो पद युवाओं को दिए गए थे, उसी फार्मूले को थोड़ा और परिष्कृत कर कांग्रेस अब नए तरीके से काम करने में जुट गई है। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस का ये नया फार्मूला भाजपा को भारी पड़ सकता है।
इस फॉमूले के तहत कांग्रेस पार्टी जल्द ही 25 हजार पदों पर युवाओं को रखने जा रही है। इसके लिए कांग्रेस ने जिले और प्रदेश स्तर पर कई कांग्रेस से जुड़े लोगों को पद देने का जिम्मा दे दिया है। माना जा रहा कि कांग्रेस पार्टी दिसंबर महीने में ही पदाधिकारियों की सूची जारी करेगा।
मोहल्ले स्तर पर होगा पदों का बटवारा :
रणनीति के इस दूसरे हिस्से के तहत कांग्रेस प्रदेश स्तर पर ही नहीं बल्कि जिलें और मोहल्ले स्तर पर भी काम करेगी। जिसके लिए पार्टी ने 25 हजार पदों पर युवाओं को रखने के लिए गुंजाइश बना ली है।
कांग्रेस से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश स्तर पर जो युवा अधिक सक्रिय होगा उसे पहले नियुक्त किया जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया इसी महीने में पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश में सेक्टर और मंडल का गठन कर लिया है। इसके बाद अब ब्लॉक लेवल पर भी काम होगा। मप्र कांग्रेस महामंत्री चंद्रिका प्रसाद ने बताया कि प्रदेश में 6400 सेक्टर और 2400 मंडल में जल्द ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री सहित अन्य पदों पर नियुक्ती होगी। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर भी ये पद दिए जाएंगे। कांग्रेस में संगठन के विस्तार को मप्र मिशन 2018 से देखा जा रहा है।
Published on:
05 Dec 2017 04:57 pm
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