
भोपाल. प्रदेश भाजपा में पिछले तीन महीने से कोर ग्रुप की एक भी बैठक नहीं हो पाई है। जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल दौरे में हर महीने बैठक करने व सत्ता-संगठन के हर बड़े फैसले को कोर ग्रुप की परिधि में लाने के निर्देश दिए थे।
सत्ता-संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने व उसकी ताकत को विकेंद्रित करने के मकसद से भाजपा ने प्रदेश स्तर पर कोर ग्रुप का गठन किया है। जून 2016 में राष्ट्रीय संगठन ने इस कोर गु्रप का पुनर्गठन करने के साथ ही इसकी ताकत बढ़ाया था, लेकिन यह जमीन पर कम ही सक्रिय दिखा।
शाह 18 अगस्त 2017 को जब भोपाल दौरे पर आए थे तो उन्होंने कोर ग्रपु की अलग से बैठक ली थी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में शाह ने साफ कर दिया था कि अब हर महीने कोर ग्रुप की बैठक होगी और सारे बड़े फैसले कोर ग्रुप से होकर ही गुजरेंगे।
सरकार के स्तर पर भावांतर, पट्टा वितरण व महिला अपराध पर कानून जैसे दूसरे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, लेकिन सत्ता और संगठन दोनों के फैसलों से कोरगु्रप की दूरी ही रही।
केरवा में किया मंथन, लेकिन कोरगु्रप नहीं था शामिल -
16 सितंबर को भाजपा के बड़े पदाधिकारियों और सरकार के कुछ मंत्रियों ने केरवा रिसोर्ट में 8 घंटे तक मैराथन मीटिंग की थी, लेकिन यह कोरगु्रप की बैठक नहीं थी। क्योंकि इसमें कुछ दूसरे सदस्य शमिल थे, तो वहीं कोरगु्रप के कुछ सदस्यों को इस बैठक में बुलाया ही नहीं गया था।
यह है भाजपा का कोरग्रुप
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और थावर चंद गेहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, पूर्व मंत्री विक्रम वर्मा और प्रदेश सरकार के दो मंत्री जयंत मलैया, राजेंद्र शुक्ला कोर गु्रप में शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के निधन से कोरगु्रप का एक पद खाली है।
Published on:
04 Dec 2017 10:06 am

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