इसके प्रयोग से मीठे पानी, रेत और सीमेंट की खपत में आएगी कमी
डॉ. अमृतफले ने बताया, एम्प्री के जियो पॉलिमरिक एंड रेडिएशन शील्डिंग गु्रप ने फ्लाई एश को समुद्री रेत और पानी में मिलाकर जियो पॉलिमरिक मटेरियल में तब्दील किया। अभी, टेट्रापॉड्स बनाने में सामान्य पानी, रेत व सीमेंट का प्रयोग होता है। जबकि एम्प्री की इस खोज के बाद वेस्ट से बेस्ट मटेरियल बनाना संभव हो गया है। इस तकनीक में समुद्र का पानी व रेत का इस्तेमाल की जा सकेगी।