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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने सीएम शिवराज को लौटाया ‘कोरोना योद्धा अवार्ड’, बोले- सम्मान से पेट नहीं भरता

- सविंदा स्वास्थ कर्मियों ने सीएम को लौटाए 'कोरोना योद्धा अवार्ड'- बुरहानपुर के 150 कर्मचारियों ने लौटाया सम्मान- गुरुवार को हड़ताल का आठवा दिन, जारी है प्रदर्शन- धार में कर्मचारियों ने दिया कलेक्टक को आवेदन

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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने सीएम शिवराज को लौटाया 'कोरोना योद्धा अवार्ड', बोले- सम्मान से पेट नहीं भरता

मध्य प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी बीते 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के अलग अलग जिलों में संविदा स्वास्थ कर्मियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है। गुरुवार को संविदा स्वास्थ कर्मियों के प्रदर्शन का आठवा दिन है। धार, बुरहानपुर में प्रदर्शन का अजब तरीका सामने आया। प्रदेशन के सातवें दिन बुरहानपुर में 150 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा कोरोना काल में सरकार द्वारा संविदा स्वास्थ कर्मियों को दिये गए प्रशस्ति पत्र और 'कोरोना योद्धा सम्मान' को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को वापस लौटा दिया। संविदा कर्मियों ने ये सम्मान डाक के जरिए लिफापे में भरकर मुख्यमंत्री को भिजवा दिए हैं।


आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में ही करीब 345 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हैं। इसमें से 150 कर्मचारियों ने स्पीड पोस्ट के जरिए प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना काल में मरीजों के इलाज में किए गए अथक और सराहनीय कार्य के बदले दिए गए कोरोना सम्मान को सीएम शिवराज को वापस लौटा दिया है। कर्मचारियों ने कहा कि, कोरोना काल के समय संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात काम किया था। अनेकों कोरोना मरीजों को कोविड-19 बीमारी से बचाया था, लेकिन सरकार हमें नियमित नहीं कर रही। ऐसे में सभी कर्मचारी अपना सम्मान वापस लौटा रहे हैं।

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सम्मान से नहीं भरता पेट

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अध्यक्ष रविंद्र सिंह राजपुत का कहना है कि, संविदा कर्मचारी कम वेतन में काम कर रहे हैं, जबकि नियमित कर्मचारी चार गुना अधिक वेतन पा रहे हैं। नियमितीकरण की प्रक्रिया स्वास्थ्य मिशन को छोड़कर हर विभाग में लागू है, जबकि संविदा कर्मचारियों को अन्य भत्ते और अवकाश पात्रता भी नहीं दी गई। इसलिए मजबूर होकर हमें ये कदम उठाना पड़ रहा है। जब तक नियमितीकरण नहीं तब तक कोई सम्मान नहीं, क्योंकि सम्मान से पेट नहीं भरता, ना ही घर चलता है।


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मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत 32000 कर्मचारियों सहित रतलाम जिले के 582 संविदा अधिकारियों कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। जिसमें रतलाम जिले के कर्मचारियों ने कालीका माता स्थित गुलाब चक्कर पर प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों को कोरोना काल मे अच्छी व्यवस्था के चलते जो मुख्यमंत्री द्वारा प्रशस्ति पत्र दिए गए उन्हें वापस वापस लौटाने की तैयारी की और नियमितीकरण के नारे लगाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा कहा गया था कि कोरोनाकाल में संविदा कर्मचारियों ने अच्छी सेवाए दी है इस लिए यह प्रशस्ति पत्र दिया जा रहा है और दूसरी ओर हम संविदा कर्मचारियों की मांगों को नजर अंदाज किया जा रहा है।

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मांगे पूरी न होने तक जारी रहेगा आंदोलन- स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अध्यक्ष

उन्होंने ये भी बताया कि, मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। वहीं, भोपाल समेत प्रदेश के करीब डेढ़ लाख स्वास्थ्यकर्मी काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं। वहीं, इससे पहले मंगलवार को प्रदेश के तमाम जिलों से हजारों स्वास्थ्यकर्मी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने पहुंचे थे, जहां उन्होंने सीएम के समक्ष अपनी मांगों को रखा था।

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