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ठेकेदारों ने दबाए टैक्स के 223 करोड़.. देखें पूरा मामला!

एमपीआरडीसी ने जमा करने के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

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MPRDC

भोपाल। बीओटी मोड पर सडक़ बनाने वाली छह कंपनियों ने सरकार के 223 करोड़ रुपए दबा लिए। वे तीन साल से टोल टैक्स का हिस्सा सरकार को नहीं दे रही हैं। इसका खुलासा एमपीआरडीसी के ऑडिट में हुआ है। कॉरपोरेशन ने कंपनियों को 15 दिन में 223 करोड़ रुपए प्रीमियम जमा करने का नोटिस दिया है। इन ठेकेदारों ने प्रदेश में एक दर्जन सडक़ें बीओटी मोड पर बनाने का अनुबंध किया था। अनुबंध के अनुसार उन्हें टोल वसूली का कुछ हिस्सा एमपीआरडीसी को हर साल देना था।

शुरूआत में इनसे प्रीमियम राशि जमा करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। हाल ही में एकाउंट ऑडिट में तीन साल के करोड़ों रुपए बकाया की बात सामने आने पर कॉरपोरेशन ने सख्ती दिखाई है। कंपनियों से कहा है कि तय समय में बकाया प्रीमियम जमा नहीं किया तो टोल सस्पेंड कर दिया जाएगा। इनमें भोपाल बाइपास रोड बनाने वाली ट्रांसट्राय इंडिया लिमिटेड भी शामिल है। अब प्रदेश की सभी सडक़ों की गुणवत्ता की भी मुख्यालय स्तर से मॉनिटरिंग की जा रही है। खराब पाई जाने पर संबंधित कंपनियों पर पेनल्टी
लगाई जाएगी।

रोड बकाया
भोपाल बाइपास 930382563
लेबड-मानपुर 32702026
मऊ-खाटविल्लोद 845918888
बीना खरबई सिरोंज रोड 35087325
इंदौर उज्जैन रोड 380397350
उज्जैन-उन्हाल रोड 12635188

इनको दिया नोटिस
ट्रांस ट्राय इंडिया लिमि. भोपाल बाइपास टोलवेज लिमिटेड, वलेचा टोलवेज लिमिटेड, एस्सल मऊ घाट-बिल्लोद टोल रोड्स लिमिटेड, टेली कम्युनिकेशन इंडिया लिमिटेड, महाकालेश्वर टोलवेज लिमिटेड और उज्जैन-उन्हाल-जौरा टोल लिमिटेड को नोटिस दिए गए हैं। प्रदेश के प्रत्येक टोल नाके पर वाहनों से हर दिन 7-8 लाख रुपए शुल्क लिया जाता है। सबसे ज्यादा शुल्क व्यावसायिक वाहनों से मिलता है।

जिन कंपनियों ने टोल राशि का प्रीमियम जमा नहीं किया, उन्हें नोटिस दिया गया है। इसके लिए उन्हें कुछ समय दिया गया है।
-आलोक चतुर्वेदी, चीफ इंजीनियर, एमपीआरडीसी

शहर के अंदर ई-वे बिल जून से लागू

भोपाल में जीएसटी के तहत शहर के अंदर ई-वे बिल जून से शुरू करने की तैयारी है। इसमें उन वस्तुओं को भी शामिल किया जाएगा, जिन्हें अभी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल में शामिल नहीं किया गया है। जीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर मिलिंद लांजेवार ने बताया कि प्रदेश में इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 25 अप्रैल से शुरू किया गया है। इसमें पान मसाला, स्टील, प्लाई बुड सहित 11 वस्तुएं शामिल हैं। जबकि, करीब 300 वस्तुओं को जून से इ-वे बिल में शामिल किया जाना है। शहर के अंदर 10 किमी के दायरे में अगर कोई वस्तु का परिवहन किया जाता है, जिसकी कीमत 50 हजार रुपए या इससे अधिक है तो उसे भी ई-वे बिल तैयार कराना पड़ेगा। ई-वे बिल के बिना परिवहन करने पर माल की कीमत के बराबर पेनल्टी लगाई जाएगी।