
गऊ माता को दूध पीकर दुत्कार दिया : प्रदेश में सात साल में दोगुना हो गया आवारा गोवंश
भोपाल. राजधानी के समीप बैरसिया के बसई गांव में भाजपा नेत्री की गोशाला में 30 जनवरी को सौ से ज्यादा गायों की मौत के बाद पूरे प्रदेश में गोवंश को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले के बाद गोशालाओं की छानबीन में सामने आया है कि इनमें क्षमता से ज्यादा गायें रखी जा रही हैं। इनमें ज्यादातर गायें बूढ़ी, कमजोर हैं। गोशाला संचालकों का कहना है कि लोग जब तक गाय दूध देती है तब तक उसे रखते हैं, उसके बाद लावारिस छोड़ देते हैं। यही कारण है कि 2012 से 2019 तक सात साल में मध्यप्रदेश में आवारा गोवंश की संख्या दोगुना हो गई है। भारत सरकार की19वीं पशुगणना-2012 के अनुसार मप्र में 4 लाख 37 हजार आवारा गोवंश था। वहीं, 20वीं पशुगणना-2019 के अनुसार मप्र में आवारा गोवंश 8 लाख 53 हजार तक पहुंच गया।
इतना ही नहीं इन सात सालों में प्रदेश में 8 लाख 51 हजार गोवंश घट भी गया। जबकि प्रदेश में 1532 गोशालाएं चल रहीं हैं।
आखिर क्यों घट रहा है गोवंश
1- चारे की कमी सबसे बड़ी समस्या, मिल भी जाए तो बहुत महंगा मिलता है
2- गोपालन लाभ का धंधा नहीं बन पाया
3- गोपालन के लिए समय और मेहनत ज्यादा लगती है
4- उपयोगी न रहने पर लावारिस छोड़ देना
5- गोवंश को लेकर चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से न होना
बेहतर देखभाल से फिर से दूध देने लगी गायें
गोवंश घटने और आवारा गोवंश बढऩे के लिए सरकार के साथ वे लोग ज्यादा जिम्मेदार हैं जो दूध निकालने के बाद उन्हें छोड़ देते हैं। गोशालाओं में ज्यादातर बूढ़ी, बीमार और कमजोर गायें आती हैं। गोशालाओं में कैसे गायों का बेहतर रखरखाव हो सकता है, गायों की देखभाल कर कैसे गोवंश को बढ़ाया जाए इसके लिए और प्रयास करने होंगे। हमारी गोशाला में बेहतर देखभाल के कारण वे गायें भी फिर से दूध देने लगीं जिन्हें लोगों ने छोड़ दिया था।
- अशोक जैन, संचालक, जीव दया गोशाला, भोपाल
Published on:
10 Feb 2022 06:30 am
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