5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब राजधानी के सबसे साफ डैम पर संकट: कब्जे डूबे, लेकिन जिम्मेदार बेफिक्र

Crisis in bhopal: जल संसाधन विभाग को केवल डैम की चिंता, जिला प्रशासन को लेनी होगी सुध...

3 min read
Google source verification
crisis_in_bhopal_kaliyasrotra_dam.jpg

,,

भोपाल@प्रवीण मालवीय की रिपोर्ट...
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश से कलियासोत डैम के बैक वॉटर में भदभदा सब्जी मंडी से लेकर कई फार्म हाउस तक डूब चुके हैं, लेकिन अतिक्रमणकारी डैम की जमीन पर कब्जा छोडऩे को तैयार नहीं।

इसके बावजूद कोई जिम्मेदार विभाग इन्हें हटाने की कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। पर्यावरणविदें का कहना है कि बड़े तालाब की तरह कलियासोत की सीमाओं के जल्द सीमांकन और इसके लिए प्राधिकरण बनाए जाने की जरूरत है। वरना शहर के बीचों-बीच आ चुका यह खूबसूरत डैम सबसे साफ जल स्रोत के बजाय अतिक्रमण और गंदगी से पट जाएगा।

मंडी के तंबू, फार्म हाउस की बाउंड्री डूबी
जल संसाधन विभाग से चर्चा किए बगैर सितंबर 2018 में कलियासोत के बैक वॉटर क्षेत्र में भदभदा मंडी शिफ्ट कर दी गई। बीते एक साल में जल संसाधन विभाग ने इस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई। अगस्त माह में भदभदा के गेट खुलते ही कलियासोत पूरा भरा तो यह मंडी डूब गई। फिर भी मंडी के व्यापारी अपने प्लास्टिक शीट के टेंट यहीं छोड़ गए हैं, जो पानी के बीच दूर से साफ नजर आते हैं।

उधर, साक्षी ढाबे से बुल मदर डेयरी की ओर जाने वाले रास्ते पर कलियासोत की तरफ काटे गए फार्म हाउस की बाउंड्री भी पानी में डूबी दिख रही है। इसी तरह तेरह शटर तक किनारे-किनारे जाने वाली सड़क पर डैम की ओर कई अतिक्रमण देखे जा सकते हैं।

इन निर्माणों से निकलने वाला वेस्ट सीधे डैम के पानी में मिल रहा है। इसके बाद भी प्रशासन ने कलियासोत की सरहद तय करके इन अतिक्रमणों को चिह्नित करने या हटाने की कार्रवाई अब तक नहीं की है।

सीमांकन-मॉनिटरिंग से बच पाएगा डैम
पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडेय के मुताबिक भदभदा डैम के डाउन स्ट्रीम में बना कलियासोत शहर का दूसरा बड़ा जल स्रोत है। बड़े तालाब के सीमांकन, उसके पानी की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग, अतिक्रमण रोकने-हटाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, वैसी पहल कलियासोत के लिए नजर नहीं आती।

डैम जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी माना जाता रहा। विभाग का फोकस डैम की दीवार और डाउन स्ट्रीम पर है। कलियासोत के लिए अलग से प्राधिकरण बनाए जाने, इसके सीमांकन, पानी की गुणवत्ता की सतत मॉनिटरिंग की जरूरत है।

विभाग का जलभराव क्षेत्र के अतिरिक्त कोई अधिकार नहीं रहता। डैमों का बैक वॉटर बेहद बड़े क्षेत्र में फैला रहता है। भराव के पीछे की तरफ होने वाले निर्माणों पर विभाग का नियंत्रण नहीं रहता।
- एमएस डाबर, ईएनसी, जल संसाधन विभाग

कलियासोत के बैक वॉटर में हुए अतिक्रमण पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इससे जुड़े सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा तब ही शहर हित में इसे बचाया और सुधारा जा सकेगा।
- तरुण पिथोड़े, कलेक्टर, भोपाल

इधर, सूचना मिलने पर टीम लेकर छोला पहुंचे कलेक्टर:
वहीं दूसरी ओर रविवार को सुबह से जारी बारिश के बीच कलेक्टर तरुण पिथोड़े सरकारी अमले को लेकर छोला रोड पहुंचे। छोला नाले के उफनाने की वजह से यहां निचले इलाकों में पानी घुसने लगा था। इसकी सूचनास्थानीय रहवासी किसी युवक ने कलेक्टर को मोबाइल पर दी थी।

इस पर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को लेकर मौके पर पहुंचे। छोला नाले के रास्ते का निरीक्षण किया। कलेक्टर पिथोड़े ने संकरे हो चुके इस नाले को चौड़ा करने नगर निगम को प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नाला वर्तमान में काफी संकरा हो गया जिसके चलते तेज बारिश के दिनों में यहां पानी उफान पर आ जाता है। इसके चलते आसपास के घरों में पानी घुस रहा है।

कलेक्टर के पहुंचने की सूचना पाकर मौके पर नगर निगम एएचओ भी टीम के साथ पहुंचे। एएचओ ने बताया गर्मी के मौसम में नाले का रास्ता साफ करवा दिया था, इसलिए पिछले सालों जैसी जल प्लावन की स्थिति नहीं बन रही है।