
भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन संस्कृतियों में से एक
भोपाल. भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन संस्कृतियों में से एक है और अनेक विद्वानों ने भी इसे प्राचीन संस्कृतियों की जननी माना है। इस तथ्य के आलोक में कई पुरातात्विक शोध भी हुए हैं और इन खोजों ने विगत सात हजार वर्ष ईसा पूर्व तक भारतीय संस्कृति की अविरलता को सिद्ध किया है। ये कहना है नीलेश नीलकंठ ओक का, जोयंग थिंकर्स फोरम और इन्डिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को आयोजित भारतीय संस्कृति की प्राचीनता विषय पर विचार व्यक्त कर रहे थे। आरजीपीवी में आयोजित व्याख्यान में उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता पर प्रकाश डाला। उन्होंने खगोल से इसका संबंध तथ्यों के साथ प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिखाया।
सही अर्थ नहीं निकाले जा सके
उन्होंने कहा कि इन शोधों की पुष्टि में पुरातत्व के अलावा आनुवंशिकी, कृषि, जलवायु विज्ञान, समुद्र विज्ञान आदि विषय का भी सहयोग लिया है। ओक ने महाभारत का वर्ष 5561 ईसा पूर्व होना सिद्ध किया। साथ ही कहा कि दुर्भाग्य है कि भौतिक साक्ष्यों के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं होने की वजह से इन तथ्यों के सही अर्थ नहीं निकाले जाते हैं। प्राय: सामान्य व्यक्तियों को इनकी जानकारी भी नहीं होती है। कठिन विज्ञान के अनेक विषय हैं, जो २४ हजार वर्ष और उसके बाद के भारतीय संस्कृति और सभ्यता की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश सहित विदेशों में भी कई स्थानों पर ऐसे स्थान आज भी हैं, जहां भारतीय पुराणों से जुड़े साक्ष्य हैं, जो बताते हैं कि भारत की प्राचीन संस्कृति कभी पूरे विश्व में जानी जाती थी और इसे सम्मान की नजर की से देखा जाता था।
Published on:
21 Jan 2020 02:00 am
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