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गूगल-पे, पेटीएम, अमेजन, फ्लिपकार्ट चलाते हैं तो अब सावधान ! इंटरनेट पर लाखों में हैं ‘फर्जी लिंक’

सावधान रहें...सेवा के नाम पर धोखा दे रहे जालसाजसाइबर गाइडलाइन को समझकर आप खुद कर सकते हैं अपना बचाव

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भोपाल। किसी भी कंपनी, संस्था और सर्विस प्रोवाइडर के नाम के साथ डोमन रजिस्ट्रेशन की आसान प्रकिया अब लोगों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। किसी भी बड़े ब्रांडनेम के साथ डॉट कॉम, डॉट नेट, डॉट बिज जोड़कर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया जा रहा है। इस तरह की शिकायत के बाद अभी हाल ही में लगभग तीन हजार फर्जी लिंक को इंटरनेट सर्च इंजन से हटाया गया, लेकिन इनमें से आधे फिर वापस आ गए।

अलग-अलग राज्यों की साइबर सेल से मिले फीडबैक के बाद केंद्रीय एजेंसियों ने मामले की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि ऑनलाइन डोमेन रजिस्ट्रेशन की आसान प्रक्रिया के चलते जालसाज बार-बार फर्जी लिंक लेकर गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर दोबारा दिखने लगते हैं। अब जांच एजेंसियां डोमेन रजिस्ट्रेशन करने वाले नेटवर्किंग सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से संपर्क कर ऐसा फायर वॉल सिस्टम बनाने के प्रयास में है, जिससे फर्जी लिंक बनाने वाला उसी समय पकड़ में आ जाए।

डोमेन को जानिए...

फर्जी डोमेन रजिस्ट्रेशन कराना वैसा ही है, जैसे आपके रजिस्टर्ड मकान पर कोई और अपना नाम पता लिखकर दुनिया भर में प्रचार करे। डोमेन रजिस्ट्रेशन सर्विस प्रोवाइडर ईमेल आईडी एवं मोबाइल नंबर पर आने वाले वन टाइम पासवर्ड के आधार पर डोमेन रजिस्टर्ड कर देते हैं। ये उनका भौतिक सत्यापन का तरीका है। जालसाज फर्जी आइडी और सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इस कारण किसी भी कंपनी का नाम इस्तेमाल कर डोमेन लेकर नेट पर आ जाते हैं। इंटरनेट पर संबंधित कंपनी के बारे में क्वैरी आते ही फर्जी लिंक सामने आ जाते हैं। इन लिंक पर हैकर की नजर रहती है। यहां आने वाले फोन यूजर को मिरर एप्लीकेशन जैसे ऐप डाउनलोड करवाकर आसानी से खाता खाली कर दिया जाता है। इसलिए इस तरीके के लिंक पर बिल्कुल क्लिक न करें।

इनसे मिलती मदद

गो-डैडी, गूगल, होस्टिंगर, नेमचीप, बिग रॉक, नेट फॉर इंडिया, स्क्वेयर ब्रदर, इंडियालिंक्स, वन एंड वन, जेनिटिव, ब्लूहोस्ट, होस्टगेटर, ड्रीम होस्ट, शोपिफाई, बॉडी डोमेन जैसे डीएनएस सर्विस प्रोवाइडर ऑनलाइन यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

अमित सिंह, डीसीपी, साइबर क्राइम का कहना है कि फर्जी वेब लिंक के बारे में जानकारियां एजेंसियों से साझा की जाती रही हैं। गाइड लाइन का पालन एवं जागरूकता के साथ इनसे बचाव किया जा सकता है।