
भोपाल@हितेश शर्मा की रिपोर्ट...
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले के तामिया की रहने वाली 27 साल की भारतीय पर्वतारोही भावना डेहरिया ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चाेटी किलिमंजारो पर दीपावली के दिन फतह हासिल कर भारत का तिरंगा लहराया। समुद्र तल से 5,895 मीटर यानी 19 हजार 341 फीट ऊंची उहुरू शिखर पर भारतीय पर्वतारोही भावना डेहरिया ने 27 अक्टूबर 2019 दीपावली के दिन शिखर पर दीपक रख कर एकोफ़्रेंडली दीवाली मनाने का मैसेज दिया साथ ही पॉलीथिन के हर व्यक्ति को अपने स्तर पर कम उपयोग करने का आह्वान किया।
23 अक्टूबर को तंजानिया से शुरू किया
भोपाल से फिजिकल एजुकेशन में एमपीइडी मास्टर्स की पढ़ाई करने वाली भावना डेहरिया ने अकेले ही यह चढ़ाई पूरी की इस दौरान उनके साथ तंजानिया के गाइड थे। भावना ने यह ट्रैक 23 अक्टूबर को तंजानिया से शुरू किया और 27 अक्टूबर को रात 12 बजे आखरी कैम्प किबो हट से फाइनल चढ़ाई शुरू कर 7 घंटे 43 मिनट में किलिमंजारो की सबसे ऊंची चोटी उहुरू शिखर पर सुबह 7:43 बजे समिट किया।
दुनिया की सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवेरेस्ट पर फतेह
बतौर भारतीय महिला इतना कम समय में यह चढ़ाई अपने आप मे एक रिकॉर्ड है। भावना डेहरिया ने इसी साल 22 मई को दुनिया की सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवेरेस्ट (8848 मी.) पर भी फतेह हासिल की थी और उसी दिन समिट करने वाली मध्यप्रदेश की प्रथम महिलाओ में एक होने का स्थान पाया है।
माउंट एल्बु्रस को फतह किया
इसके पहले मप्र की पहली ऐवरेस्टर मेघा परमार ने यूरोप के सबसे ऊंचे पर्वत पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया था। उन्होंने रूस के पर्वत माउंट एल्बु्रस 8 अगस्त 2019 को स्थानीय समय अनुसार दिन में 10.14 बजे चढ़ा। मेघा मध्यप्रदेश की प्रथम बेटी है, जिसने माउंट एल्बु्रस को फतह किया था। मेघा को महिला एवं बाल विकास विभाग मप्र ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेसडर ( BRAND AMBASSADOR ) बनाया है। इसी कड़ी में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के साथ ‘ट्रस्ट मी’ समाज बेटियों पर भरोसा करे-बेटियां असंभव कार्य भी करती हैं...’ का संदेश दिया था।
एमपी के सीहोर जिले की बेटी मेघा
गौरतलब है कि सीहोर के गांव भोजनगर के किसान दामोदर परमार और मंजू की बेटी मेघा ने हाल ही में दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट को फतह किया था, ऐसा करने वाली वह प्रदेश की पहली बेटी हैं। मध्यप्रदेश मंत्री मंडल द्वारा मेघा का सम्मान 3 जून को किया गया था।
5 अगस्त को गई थी अभियान पर:
मेघा ने अपने अभियान की शुरुआत 5 अगस्त 2019 की थी। फाइनल समिट के लिए वे 8 अगस्त को रात 1 बजे निकली। फिर सुबह 10.14 पर चोटी पहुंचकर समिट किया। मेघा की टीम में अरुण, आशा, महिपाल, सतीश और शेखर रहे। इसमें आशा का स्वास्थ्य खराब होने से समिट नहीं हो सका।
माउंट एल्ब्रस के बारे में
माउंट एल्ब्रस तकनीकी पर्वत निष्क्रिय ज्वालामुखी है जो पश्चिमी काकेशस पर्वत श्रृंखला में स्थित है, जो कबरदीनो-बलकारिया और करचाय-चर्केसिया, रूस में जॉर्जियाई सीमा के पास है।18,510 फीट (5,642 मीटर) की ऊँचाई के साथ, यह काकेशस रेंज का हिस्सा है जो एशिया और यूरोप मे फैला है। यह इसे यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत और सात शिखर में से एक बनाता है, प्रत्येक महाद्वीप के सबसे ऊँचे पर्वत और कुलीन पर्वतारोही इन सभी को शिखर देने की आकांक्षा रखते हैं।
माउंट एल्ब्रस की प्रमुखता
पास की चोटियों से पहाड़ कितना अलग है, इसका माप - 15,554 फीट (4,741 मीटर) है, जो इसे दुनिया का 10 वां सबसे प्रमुख पर्वत बनाता है। पूर्वी शिखर 18,442 फीट (5,621 मीटर) से थोड़ा कम है।
Updated on:
28 Oct 2019 02:23 pm
Published on:
28 Oct 2019 02:21 pm
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