
भोपाल. तकनीक में तेजी से बदलाव हो रहा है। अब हर जगह डिजीटल मैप का सहारा लिया जा रहा है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ यहां कैरियर की बेहतर संभावनाएं बन रही हैं। राजधानी के विभु इस दिशा में काम कर रहे हैं। आपातकाल में ड्रोन के जरिए सामान और सर्विसेस पहुंचाने के लिए इनका स्टार्टअप है। इस दिशा में प्रदेश में बड़े स्तर पर काम हो रहा है। एक्सपर्ट की मांग ज्यादा है। कई क्षेत्र हैं जहां जॉब मुहैया हैं।
विदेशों में संभावनाएं
भारत में अब भी बेहतर डिजिटल मैप उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं विदेशों की बड़ी वैज्ञानिक संस्थाओं में भी जीआइएस के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है। टारगेट एरिया की मैपिंग की जाती है। मैपिंग करने के बाद इकट्टठी की गई डाटा की मदद से ऑफिस के अन्दर ही उस पूरे क्षेत्र की सही जानकारी तुरंत निकाल ली जाती है।
जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल डिफेस, अर्थ साइंस, आर्किटेचर, एग्रिकल्चर, न्यूक्लियर साइंस, टाउन प्लानर, मोबाइल तथा पे मैपिंग आदि के क्षेत्रों में बडे पैमाने पर किया जाता है। जानकारों ने बताया कि डिजीटल टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग और हाईटेक कार्य प्रणाली भूगोल की एक शाखा है। जीआइएस का इस्तेमाल डेवलपमेंट अथॉरिटी और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे विषयों में भी होता है। इस तकनीक के जरिए डिजिटल मैप तैयार होगा। जीआइएस के जानकार प्रोफेशनल डेटा एनालिसिस में मददगार साबित होते हैं। भूगोल की इस शाखा की बढ़ती हुई जरूरत और इस्तेमाल की वजह से इस क्षेत्र के प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ी है।
जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रमुख क्षेत्र
- जीआइएस ऐप्लिकेशन
- वेब जीआइएस
- जीआइए डेवलपमेंट
- जीआइएस प्रोजेक्ट डेवलपमेंट
- जिओस्टेटिस्टीक
- फोटोग्रामेट्री
यहां से कर सकते हैं कोर्स
- इंडियन इंस्टीट्यूट द ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर
- एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर, राजस्थान
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की
- जीआईएस इंस्टीट्यूट, नोएडा
- बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची
- इंडियन इंस्टीट्यूट रिमोट सेंसिंग, देहरादून
ये योग्यता जरूरी
आर्ट्स के माध्यम से जियोग्राफी या फिजिक्स केमिस्ट्री के साथ साइंस विषय की पढ़ाई करने के बाद आप बीई, बीएससी, बीटेक या बीए इन जियोग्राफी, जिओलॉजी, अप्लायड जिओलॉजी, अर्थ साइंस, जिओसाइंस से ग्रेजुएशन कर सकते हैं। इसके अलावा डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएशन किया जा सकता है।
विज वी स्टार्टअप, भोपाल के विभु त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में अधिकांश सर्विसेस जीआइएस के सहारे चल रही हैं। ऐसे में इस सेक्टर में जानकार और एक्सपर्ट की जरूरत है। ड्रोन अन्य आपातकालीन सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करता है जहां लोग किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण फंसे हुए हैं। इस प्रकार प्रतिकूल परिस्थितियों में राहत सामग्री पहुंचाने में मदद होती है।
ग्वालियर की जॉग्रफी एक्सपर्ट, डॉ. दीपि गौड़ ने बताया कि जीआइएस में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स और प्रोग्रामिंग कोर्स करके डवलपमेंट अथॉरिटी जिओ इन्फॉर्मेटिक्स और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है। आपदा प्रबंधन और हे के डिजिटल मैप तैयार करने में एक्सपर्ट की आवश्यकता होती है। आर्ट्स में जॉग्रफी लेने वाले विद्यार्थी भी इसमें अच्छा करियर बना सकते हैं।
Published on:
17 Apr 2022 08:12 pm
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