
Diabetes
आशीष एस. सक्सेना
Diabetes: मेटाबॉलिज्म का अव्यवस्थित होना डायबिटीज मेलिटस का कारण बन सकता है। गलत समय में दही का इस्तेमाल इस खतरे को बढ़ाता है। डायबिटीज के मरीज यदि दही न खाएं तो ब्लड शुगर नियंत्रित हो सकती है। यह खुलासा शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय के शोध में हुआ है।
चरक संहिता के आधार पर महाविद्यालय में डायबिटीज पर हुए शोध हो रहे हैं। 5 साल में दवा के प्रभाव के 4 अहम शोध हुए हैं। इसमें पता चला कि खान-पान व दिनचर्या गड़बड़ाने से मेटाबोलिज्म सिस्टम बिगड़ रहा है, डायबिटीज मेलिटस के मरीज बढ़ रहे हैं। आयुर्वेद से इसे खत्म किया जा सकता है। आयुर्वेदिक मेडिसिन के प्रो. ओपी व्यास का दावा है कि कई डायबिटीज मेलिटस के रोगी स्वस्थ हुए हैं।
डायबिटीज का रूप डायबिटीज मेलिटस है। यह अव्यवस्थित खाना या मेटाबोलिज्म डिस्टर्ब होने से होता है। शुगर सिस्टम का संबंध पेनक्रियाज से है। बीटा सेल्स इंसुलिन तो गामा सेल्स ग्लूकागॉन सिक्रेशन करती है। ज्यादा शकर खाने से इंसुलिन सिक्रेशन बढ़ता है। शकर स्टार्च में बदलती है। पेनक्रियाज इसे रिजर्व करता है। शकर कम होने पर ग्लूकागॉन सिक्रेशन बढ़ता है, तब पेनक्रियाज स्टार्च को तोड़ ग्लूकोज में बदल देता है। इस सिस्टम का बिगड़ना ही डायबिटीज मेलिटस है।
आयुर्वेद आयु (उम्र) व वेद (विज्ञान) से बना है। जन्म से मृत्यु तक का विज्ञान इसमें समाहित है। डायबिटीज पर शोध हुए हैं। मेटाबोलिज्म बिगड़ने से डायबिटीज मेलिटस होता है। आयुर्वेदिक इलाज से यह खत्म हो जाती है। - प्रो. ओपी व्यास, आयुर्वेदिक मेडिसिन (एमडी, पीएचडी)
शोध के अनुसार, मधुमेह मरीज दही खाना छोड़े तो शुगर मुक्त होने में मदद मिलती है। दही सभी क्रियाओं को स्तंभित करता है। इससे मेटाबोलिज्म बंद सा हो जाता है और शरीर में जमा खाद्य सामग्री सड़ जाती है। सही समय में दही खाना पाचनक्रिया के लिए फायदेमंद है। गर्मी में सुबह 9-10 बजे ताजा दही लेना अच्छा है। दही खाने के 10 घंटे तक सोना नहीं चाहए। ऐसा करने से पाचन क्रिया जाम करता है।
Published on:
11 Aug 2024 01:07 pm
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