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एमपी के इन पहाड़ों में मिला 57 करोड़ साल पुराना जानवर

सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व की भीमबेटका यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज में भी शामिल है। यहां डिकिन्सोनिया फॉसिल भी मिल चुका है जिसे करोड़ों साल पुराना जानवर बताया जाता है।

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Dickinsonia fossil found in UNESCO World Heritage Bhimbetka

हितेश शर्मा, भोपाल. अजब गजब एमपी में आज भी कई जगहों पर घने जंगल हैं। यहां के पहाड़ों में करोड़ साल पहले के जानवरों के अवशेष मिले हैं। एमपी की राजधानी भोपाल के पास की भीमबेटका की गुफाएं तो विश्वविख्यात हैं जहां हजारों साल पुरानी रॉक पेंटिंग्स आज भी सुरक्षित हैं। सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व की भीमबेटका यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज में भी शामिल है। यहां डिकिन्सोनिया फॉसिल भी मिल चुका है जिसे करोड़ों साल पुराना जानवर बताया जाता है।

एमपी में मानव सभ्यता के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है।
खासतौर पर यहां के पहाड़ों, गुफाओं पर भी रिसर्च की जा रही है। भू वैज्ञानिकों का कहना है कि विंध्य पर्वतमाला का निर्माण करोड़ों वर्ष पहले ही हो चुका था। धीरे धीरे यहां मानव सभ्यता का विकास होता गया। भीमबेटका की गुफाओं में पाई गईं रॉक पेंटिंग्स मानव सभ्यता के शुरुआती दौर की ही बताई जाती हैं।

खास बात यह है कि यहां दुनिया का सबसे दुर्लभ और सबसे पुराना जीवाश्म भी मिला था। वर्ष 2019 में दो वैज्ञानिकों ने करोड़ों वर्ष पहले के इस जीवाश्म को खोजने का दावा किया था। शोधकर्ता इसे भारत में डिकिन्सोनिया का पहला जीवाश्म बताते हैं, जोकि करीब 57 करोड़ साल पुराना जानवर माना जाता है।

भू वैज्ञानिकों के लिए भीमबेटका सबसे ज्यादा रुचि का स्थान है। यहां घूम रहे वैज्ञानिकों की नजर जैसे ही तीसरी नंबर की गुफा पर गई, वे हैरान रह गए। इस गुफा की छत पर पत्ती जैसे आकार की चीज दिखी लेकिन यह कुछ अलग ही थी।

वैज्ञानिकों ने जांच के बाद इसे डिकिन्सोनिया फॉसिल बताया था। यह कैम्ब्रियन काल में प्रारंभिक, सामान्य जीवों और जीवन की शुरुआत के बीच प्रमुख कड़ी में से एक है। इसे दो कोशिकीय जीव का फॉसिल बताया गया, जोकि दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी मिल चुका है।

मानव सभ्यता के विकास व पहाड़ों की उत्पत्ति पर रिसर्च
यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल भीमबेटका की गुफाओं और पहाड़ों का सर्वे कर अब इसके सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व का पता लगाया जा रहा है। इस तरह की रिसर्च यहां पहली बार होगी। बता दें कि यहां की गुफाओं में मानव सभ्यता के शुरुआती दौर में रॉक पेंटिंग्स पाई गई थी। ये पेंटिंग्स तीन हजार वर्ष तक पुरानी है। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) इन पहाड़ों का ओएसएल डेटिंग कर पता लगाएगा कि इनकी उत्पत्ति कैसे हुई थी।

एएसआइ के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज कुमार कुर्मी के अनुसार, पहाड़ और जंगल क्षेत्र में ऑप्टिकल स्टिम्यलैटिड ल्यूमिनेसेंस डेटिंग की जाएगी। उत्खनन और अन्वेषण के माध्यम से ये भी पता लगाया जाएगा कि इन गुफाओं का निर्माण कैसे और कब हुआ। इस क्षेत्र में मानव सभ्यता के विकास के क्या कारण रहे। सैंपल की लैब में जांच भी कराई जाएगी।

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