
भोपाल. जीवन में रंगों का बड़ा महत्व है। देश की राजनीति भी कपड़ों के रंग के इर्दगिर्द ही घूम रही है। कपड़ों के रंगों के आधार पर लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा लड़ाई भोपाल में छिड़ी हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह सफेद कुर्ता पहनते हैं, जबकि बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा गेरुआ यानी कि भगवा वस्त्र धारण करती हैं।
दिग्विजय और प्रज्ञा तक लोग यही समझ रहे थे कि नेता लोग सफेद कुर्ता पैजामा पहनते हैं और साध्वी संत हैं इसलिए भगवा धारण की हुईं हैं। लेकिन कंप्यूटर बाबा के नेतृत्व में धूनी ताप रहे सारे साधु-संत सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं। वहीं, साध्वी प्रज्ञा के साथ घूमने वाले तमाम साधु-संत हमेशा गेरुआ या लाल रंग के कपड़े पहने रहते हैं।
ऐसे में हिंदू धर्म में इन दोनों रंग के कपड़ों का अलग महत्व बताया गया है। आइए आपको हम बताते हैं कि इन रंग के कपड़ों का महत्व। आखिर क्यों ये साधु-संत सफेद और गेरुआ वस्त्र धारण करते हैं।
सफेद कपड़े का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संन्यास की शुरुआत में पहली और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है ब्रह्मचर्य और पवित्रता की रक्षा। इस प्रक्रिया से गुजरने वाले को सफेद वस्त्र प्रदान किए जाते हैं। सफेद का मतलब होता है बेदाग रंग। इसलिए साधक को ध्यान रखना पड़ता है कि उस पर कहीं कोई दाग या कलंक न लगने पाए।
गेरुआ रंग का महत्व
वहीं, शास्त्रों के अऩुसार भगवा पहनने के बाद व्यक्ति लकड़ी की औरत का भी स्पर्श नहीं होना चाहिए। भगवा पहनकर आप समाज में नहीं जा सकते। भगवा वैराग्य की पराकाष्ठा और चरम है। वर्तमान में भगवा की गरिमा का ध्यान नहीं रखा जाता है। इस रंग के पहनने से मन शांत रहता है। कई साधु-संतों का इस रंग को लेकर यह मत रहा है कि इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।
Published on:
07 May 2019 05:53 pm
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