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10 सेकंड में खूंखार कैदी को कर देंगी पस्त MP की ये LADY Cop

राजधानी भोपाल में 782 जेल प्रहरियों की दीक्षांत परेड आज सोमवार को को संपन्न...

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भोपाल। राजधानी सेंट्रल जेल ब्रेक के बाद सुरक्षा दृष्टि के लिहाज से जेल मुख्यालय ने कई स्तर पर फेरबदल किया है। नवागत जेल प्रहरियों को बीएसएफ जवानों की तरह आठ माह की कड़ी ट्रेनिंग दिलाकर निपुण किया गया है। बीएसएएफ टेकनपुर और पीटीएस इंदौर से ट्रेनिंग लेकर लौटी नवागत लेडी कॉप की फौज एेसी है कि मार्शल ऑर्ट के जरिए महज 10 सेकंड में खूंखार से खूंखार कैदी को पस्त कर देंगी।

252 लेडी कॉप की यह फौज महज 30 सेकंड में एके-47 और इंसास जैसे हथियारों को खोलकर उन्हें बंद कर गोली दागने में भी माहिर हैं। लेडी कॉप ने सोमवार को फुल ड्रेस रिहर्सल परेड में अपनी कला दिखाई। फौज 20 किलो वजनी वर्फ की सिल्ली को एक हाथ से ढाई सेकंड में ब्रेक और पत्थरों की स्लाइड को एक झटके में तोड़ देती हैं। आंखें बंद कर एक मिनट में हथियार खोलकर उसे फिर से बंद करना। शांत रहकर खूंखार कैदी की हरकत को भांपना और सभी तरह के हथियारों का प्रशिक्षण शामिल है।

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महज 25 सेकंड में एक हाथ से एके-47 को बंद कर उसे लोड करने में माहिर
उपासन तिवारी और शिखा सिंह बताती हं कि उनके परिवार में कोई भी खाकीधारी नहीं है। दोनों की तमन्ना थी कि वे तन पर खाकी पहनें। सपना पूरा हुआ और वह दिन आ गया, जब नरम हाथों में कठोर हथियार थमा दिए गए। कुछ दिन लगा कि यह क्या बला है। साथ सोना, साथ रखना तो धीरे-धीरे उनकी आदत पड़ गई। अब जब हथियार हाथ में नहीं होता है, तो बैचेनी सी होने लगती है। दोनों की हथियारों से इतनी अच्छी दोस्ती और तालमेल है कि महज 25 सेकंड में वह एक हाथ से खुली हुई एके-47 को बंद कर उसे लोड करने में निपुण हैं।

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शाम ढलते ही लोग दुबक जाते हैं घरों के अंदर

बालाघाट के घोर नक्सल क्षेत्र बहिय्यर तहसील निवासी मंजुलता गौतम बताती है कि वे जिस गांव की रहने वाली हंै, वहां नक्सल एरिया है। शाम के ६ बजते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। बचपन से सपना था कि उसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहकर देश की सेवा करनी है, लेकिन परिजनों ने सहयोग नहीं किया। पिता ने हाथ बढ़ाया, मेहनत की तो तन पर खाकी पहनने का मौका मिला। अब मंजुलता कमांडो ट्रेनिंग में इतनी निपुण हंै कि वह महज १० सेकंड में बदमाश को पस्त कर सकती हैं।

* जेल ब्रेक से पहले और बाद में यह पहली मर्तबा है कि एक साथ ७५० नवागत प्रहरियों को इस तरह की कठिन ट्रेनिंग दी गई हो। 252 लेडी कॉप का यह बैच हर दक्षता में निपुण है। इन्हें मप्र की अलग-अलग जेलों में तैनात किया जाएगा।
- संजय चौधरी, डीजी जेल मप्र

भाई को कमांडो ड्रेस में देखकर आंखों में संजोया सपना
जिला जेल दमोह में तैनात की गई भारती राजगिरी बताती हंै कि वह इकलौती बहन है। उसका भाई अशोक कुमार सीआरपीएफ में कमांडो हैं। भाई को जब वह ब्लैक कमांडो ड्रेस में देखती तो वह भी कमांडो बनने का सपना बुनने लगती। भाई ने उसे प्रोत्साहित किया और वह जेल प्रहरी बन गई। ट्रेनिंग सेंटर में ब्लैक कमांडो की ट्रेनिंग ली। एक मिनट में आंखे बंद कर एके-४७ और इंसास जैसी राइफलों को खोलकर बंद कर फिर से लोड करने में माहिर हैं।

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